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डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित ने बताया भ्रष्टाचार रोकने का ये सरल उपाय, देखें वीडियो

जब जन के मन में राष्ट्रीयता होती है तो कोई राजनीति भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार नहीं कर सकती।

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Dr radha krishna dixit

Dr radha krishna dixit

आगरा। प्रख्यात लेखक, साहित्यकार, ज्योतिषवेत्ता डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित (सोरों) ने भ्रष्टाचार रोकने का सरल उपाय बताया है। उनका कहना है कि हम अपने बच्चों में राष्ट्रीयता का भाव जाग्रत करें। भगवान के साथ भारत माता की जय कहना सिखाएं। फिर वह किसी भी पद पर रहे, भ्रष्टाचार नहीं करेगा। अगर करेगा तो उसके मन में बैठी भारत माता रोकेगी।

क्या है राष्ट्रीयता

डॉ. दीक्षित आगरा क्लब में नारी अस्मिता समिति द्वारा आय़ोजित संगोष्ठी को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का विषय था- राजनीति के संक्रमण काल में हमारा दायित्व। डॉ. दीक्षित ने जब भ्रष्टाचार रोकने का सरल उपाय बताया तो हर कोई अचंभित रह गया। अपने विचारोत्तेजक संबोधन में कहा - राजतंत्र ने राज को समाज के अंतिम व्यक्ति तक जाने ही नहीं दिया। यहां तक कि अधिकारों से अछूता कर दिया। इसी कारण मुट्ठीभर लोगों ने आक्रमण किया तो बड़ी-बड़ी सेनाएं पराजित हो गईं, क्योंकि देश का जनमानस लड़ाई का परिणाम देखने को उत्सकु थे। हम 600 वर्षों तक इसलिए गुलाम रहे क्योंकि आम आदमी तक राष्ट्रनीति नहीं जाने दी गई। गुलामी के 600 साल तक भारत को जिन्दा रखा तो हमारे मनु संहिता, याज्ञवल्क्य संहिता जैसे ग्रंथों ने। जिस देश में बच्चों को भालों को नोक पर उछालकर मार दिया जाता हो, फिर भी राष्ट्र जिन्दा रहा तो इन संहिताओं के कारण। भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस , महात्मा गांधी ने राष्ट्र चेतना जगाई, भारत का साहित्य वीरता का कविताएं लिखने लगा तो आम आदमी गली-गली से निकल पड़ा। तोप के मुंह से बँधने को तैयार हो गया। भारत माता की जय के नारे लगाने लगाते हुए बलिदान हो गया। यही राष्ट्रीयता है।

राष्ट्रीयता का उदाहरण

डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित ने कहा- जब तक राष्ट्रीयता जन-जन के बीच में नहीं जाएगी, राजनीति प्रदूषित करती ही रहेगी। राजनीति शासन चलाने की प्रक्रिया है, राष्ट्रीयता नहीं है। जब कोई नागरिक राष्ट्रीयता को ध्यान में रखकर निर्णय़ लेता है तो अलग परिणाम आता है। मंथरा ने अपने निजी स्वार्थ के लिए कैकेई को समझाया। भरत को राजगद्दी दिलायी। इस राजनीतिक निर्णय से अवध जैसा सूर्यवंशी साम्राज्य धूल धूसरित हो गया। दो राजकुमार औऱ राजवधू वन को चले गए। सम्राट दशरथ ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इसके विपरीत पन्ना धाय ने राष्ट्रीयता को ध्यान में रखकर भावी राजकुमार के स्थान पर अपना बेटा रख दिया। ये है राष्ट्रीयता का उदाहरण। जब जन के मन में राष्ट्रीयता होती है तो कोई राजनीति भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार नहीं कर सकती। अकेले चाणक्य ने भ्रष्ट राजनीति को राष्ट्रीयता की नीति से उखाड़ फेंका।

भगवान की जय के साथ भारत माता की जय बुलावाइए

डॉ. दीक्षित ने कहा- गुलामी के दिन में हमने कहा- कोऊ नृप होय हमें का हानी और कहा- संतों को कहा सीकरी सो काम। इस सोच ने हमें 600 वर्षों तक गुलाम बनाए रखा। आज भी यही सोच आम नागरिक में है। विवेकानंद, दयानंद, गांधी, बोस आजाद ने जो चेतना जाग्रत की थी, वह भौंथरी हो गई है। जिनके रक्त में देश नहीं पहुंचा है, वह कैस देश सेवा कर सकता है। भगत सिंह ने अपनी मां को पत्र लिखा था कि भारत माता ही मेरी मां है। हम जैसा अपने बच्चों को बना रहे हैं,वैसे ही हो रहा है। राजनीति को सुधारने का सबसे बड़ा रास्ता है राष्ट्र के नागरिकों का मन बदलने के लिए परिवार का खड़ा होना। अपने बच्चों में राष्ट्रीयता (नेशनेलिटी) जाग्रत करो। भगवान की जय के साथ भारत माता की जय बुलावाइए। भारत माता की जय बोलना सीख गया तो भ्रष्टाचार नहीं करेगा। वैदिक काल से लेकर आज तक राष्ट्र के निर्माण में जनता की भूमिका है। अगर यह नष्ट हो गई तो राजनीति को शुचितापूर्ण नहीं बना सकते हैं।

राष्ट्र हमारी दीवारों पर आए

उन्होंने कहा- राष्ट्र हमारी दीवारों पर आ जाना चाहिए। आपके ड्राइंग रूप से कब महात्मा गांधी, चन्द्रशेखर, भगत सिंह उतर गए, किताबों से राणा प्रताप, लक्ष्मीबाई, विवेकानंद चले गए पता ही नहीं है। आखिर हम किस तरह का ऱाष्ट्रीय चरित्र विकसित करना चाहते हैं। हम केवल धन के लिए जी रहे हैं। अपनी सुविधाओं के लिए जी रहे हैं। अपने अंदर झांकेंगे तो परिवर्तन होगा।

दुर्नीति बनी राजनीति

इससे पूर्व विषय प्रवर्तन करते हुए नारी अस्मिता समिति की संस्थापिक डॉ. शशिप्रभा जैन ने कहा कि राजनीतिक आज दुर्नीति बन गई है। राजनीति के ऐसे चौराहे पर खड़े हैं, जहां हर व्यक्ति यह सोचने को मजबूर है कि उसे जाना कहां हैं। उन्होंने तुष्टीकरण, मजहब, जातिगत और वंशवाद की राजनीति को लेकर चिन्ता प्रकट की।

हमारे आचरण का संबंध राजनीति से

मुख्य वक्ता डॉ. अमी आधार निडर ने कहा कि वर्तमान राजनीति में निरंतर संक्रमण बढ़ रहा है। यह आचार, विचार, व्यवहार और संस्कार से होता हुआ हमारे परिवार में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हम वैचारिक रूप से इतने सबल बनें कि देश कभी भी राजनीतिक और वैचारिक रूप से दिग्भ्रमता का शिकार न होने पाए। राजनीति अछूती नहीं है। राजनीति में शुचिता चाहते हैं तो राजनीति अपनानी होगी। जिसे छूना नहीं चाहते हैं, उसके गंदे और अच्छे होने से क्या प्रभाव पड़ता है, अगर प्रभाव पड़ता है तो भाग लीजिए। अपने बच्चों को राजनीतिज्ञ बनाने पर विचार करें, तभी देश को अच्छे नागरिक मिलेंगे। जब नेता शहर का गुंडा और जेबकतरा बनेगा और उसे वोट देंगे तो फिर निंदा क्यों? उन्होंने कहा कि हम बुराइयों का स्वागत करते हैं, घर में नम्बर दो का पैसे आता है तो क्या रोकते हैं? हम खुश होते हैं कि तनख्वाह तो निकालनी नहीं पड़ती है। हमारे आचरण का संबंध राजनीति की पवित्रता से सीधा संबंध है। पवित्र आचरण के लोग राजनीतिक की ओऱ आकर्षित होंगे तो राजनीति में गंदगी शेष नहीं रहेगी।

महिलाएं राजनीति में आएं

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व महापौर बेबीरानी मौर्य ने महिलाओं का आह्वान किया कि वे राजनीति में आगे बढ़कर भाग लें। मंच पर डॉ. देवेन्द्र गुप्ता, डॉ. रंजना बंसल, जितेन्द्र चौहान, बबीता चौहान आदि विराजमान थे। वेकअप आगरा के अध्यक्ष शिशिर भगत, डॉ. राजीव जैन, डॉ. नीलम भटनागर, पीसीएस अधिकारी अमिताभ, मीरा अमिताभ, डॉ. पंकज, डॉ. राजीव उपाध्याय, किरण, पुष्पा, प्रमिला, आरती, सरोज, पूनम पाटनी, डिम्पल, ममता, आकांक्षा शर्मा, बबिता आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। संचालन पूनम गुप्ता ने किया। डॉ. माला गुप्ता ने आभार प्रकट किया।