
maharas
आगरा। शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने गोपियों संग वंशीवट पर महारास रचाया था। आज यह प्रासंगिक है। टूटते परिवारों को जोड़ने के लिए आगरा में शरद पूर्णिमा की रात को महारास होगा। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की श्वेत धवत रोशनी के साथ जब अमृत बरसेगा तब आगरा की जमीं पर महारास होगा।
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रास दो प्रकार का
आचार्य पंडित मृदुल कांत शास्त्री ने महारास के दृश्य को कुछ इस अंदाज में बयां किया। कहा कि रास दो प्रकार का होता है, एक नृत्य रास है और दूसरा महारास है। जब से सृष्टि बनी है नृत्य रास हर रोज होता है लेकिन महारास एक बार ही हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि श्री श्रीकृष्ण ने हजारों गोपियों संग महारास किया था। महारास के बारे में कहा गया है-
पूर्ण चंद्रमा शरद मास रस निर्झर झरे अपार,
राधा सखिया संग महारास रचावें नंद कुमार।
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टूटते परिवारों को जोड़ता है महारास
शरद पूर्णिमा की रात को अमृत बरसता है, लेकिन इसे लेने को कोई तैयार नहीं है। आज प्रेम और सौहार्द नहीं है। भाई-भाई के बीच में प्रेम खत्म हो रहा है। परिवार टूट रहे हैं, रिश्तों में जहर घुल रहा है। इस दौर में महारास प्रासंगिक है, महारास से ज्यादा प्रेम का संदेश देने वाली कोई लीला नहीं है।
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आगरा कॉलेज मैदान पर होगा महारास
आगरा कॉलेज मैदान पर शरद पूर्णिमा की रात को 23 अक्टूबर को महारास का आयोजन किया जा रहा है, यह एक पारिवारिक कार्यक्रम है, इसमें आप अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ डांडिया खेल सकेंगे, जमकर मस्ती, खरीददारी और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। व्यस्त जिंदगी में कुछ पल अपनों के लिए, वह भी पूर्णिमा की रात। प्रवेश पंजीकरण के बाद ही होगा।
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Published on:
10 Oct 2018 12:34 pm

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