
Triple talaq
आगरा। मुस्लिम मामलों के जानकार मौलाना उजैर आलम ने तीन तलाक के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कुरान हमारा मजहब है, हम कुरान को मानेंगे।
मुसलमानों को कुरान के तहत जिन्दगी गुजारने का अधिकार
मौलाना उजैर आलम ने कहा- अभी-अभी सर्वोच्च न्यायालय ने जो आदेश दिया है, उस पर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाना चाहूंगा कि आपको खूब पता है कि इस मुल्क में हर शहरी को अपने धर्म के उसूलों के तहत जिन्दगी गुजारने की इजाजत है। मुसलमानों को कुरान के तहत, ईसाइयों को बाइबिल के तहत, सिखों को गुरु ग्रंथ साहिब के तहत और हिन्दुओं को वेदों और पुराणों के तहत। हम तो कुरान के मातहत हैं। अपनी जिन्दगी कुरान के तहत गुजारेंगे। माननीय सर्वोच्च न्यायालय से ये कहना है कि जिन-जिन मजाहत में जो उसूल बनाए हैं, उन उसूलों का क्रियान्वयन ठीक से होना चाहिए। कानूनों का पालन होना चाहिए। आज दिक्कत ये हो गई है कि हिन्दू मजबह हो, सिख मजबह हो, इस्लाम मजहब हो, ईसाई मजहब हो, सबका ये हाल है हम कुरान, वेद, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब को तो खूब मानते हैं, लेकिन उन किताबों में बताए गए तालीमात को नहीं मानते हैं। उनके उसूलों को नहीं मानते हैं, उनके अहकामात को नहीं मानते।
तलाक का क्रियान्वयन ठीक से हो
उन्होंने कहा- जरूरत इस बात की है कि तलाक के सिलसिले में तलाक का तरीका और तलाक की जो शुरुआत या तलाक देने का तरीका कुरान ने दिखाया है, उसके तहत चलना हमारी जिम्मेदारी है। अनुरोध है कि कुरान में दिए गए कुराने के तरीके का गलत प्रयोग नहीं होना चाहिए।
भारत सरकार के कानून के बाद कुछ कह सकते हैं- समी आगाई
भारतीय मुस्लिम परिषद के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता समी आगाई ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय़ को पूर्ण नहीं कह सकते हैं। भारत सरकार को निर्देश दिया है कि छह माह में कानून बनाए। कानून में क्या होगा, तब कुछ कहा जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने फैसले पर अपनी सहमति नहीं जताई है। इसलिए भी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। वैसे भी तलाक को तो हम मुसलमान सही नहीं मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उसी रोशनी में फैसला दिया है। भविष्य की क्या कार्ययोजना है, यह पता चलने के बाद ही संवैधानिक या असंवैधानक बात के बारे में पता चल सकेगा। अब भारत सरकार के पाले में गेंद है।
Published on:
22 Aug 2017 01:25 pm
