
naresh paras
आगरा। पिछले महीने झारखंड के सिमडेगा में राशन न मिलने से संतोषी नामक बच्ची की मौत हो गई थी। उसमें पूरे भारत में मुदृदा गरमाया था। सभी देश के इस सिस्टम को कोस रहे थे। मीडिया में भी मामला कुछ दिन गरमाया था। लेकिन लोग धीरे धीरे मुद्दे को भूल गए। आगरा के नरेश पारस ने उसमें कोई कोताही नहीं छोड़ी। उन्होंने मानवीय आधार पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को एक कार्रवाई के लिए लेटर भेजा था। आयोग ने उस लेटर पर कार्रवाई करते हुए झारखंड के जिम्मेदार संस्था को आठ हफ्ते में कार्रवाई करने और पूरा डिटेल भेजने को निर्देश दिया है। नरेश पारस ने बताया कि उनके पास मेल आयोग से गुरुवार को आया है।
18 अक्टूबर को आया था जवाब
झारखंड में भूख से संतोषी की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था। आगरा के नरेश ने उसके दूसरे दिन ही मानव अधिकार आयोग को लेटर लिखने का मन बना लिया था। 18 अक्टूबर को उन्हें एक मेल मिला जिसमें उनकी शिकायत को स्वीकारने की बात थी। नरेश ने बताया कि उनकी उम्मीद और जग गई कि कोई बड़ा एक्शन लिया जाएगा। ठीक एक महीने बाद मानव अधिकार आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को उन्हें एक मेल आयोग की तरफ से फिर मिला जिसमें कार्रवाई की पूरी जानकारी है। आयोग ने झारखंड की जिम्मेदार संस्था को निर्देशित किया है कि आठ सप्ताह में कार्रवाई कर के पूरी रिपोर्ट भेजी जाए। पारस ने बताया कि बच्चों के साथ ऐसी घटनाएं न हो इसलिए मानव अधिकार आयोग को शिकायत भेजकर अवगत कराया है।
बुधवार को बरेली में भी एक महिला की भूख से मौत का मामला सामने आया था। गुरूवार को प्रशासन ने बताया कि उस महिला की मौत भूख से नहीं बल्कि बीमारी से हुई थी। समय समय पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं।
हो कड़ी कार्रवाई
बच्चों को अधिकार दिलाने के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता आगरा के नरेश पारस ने बताया कि
झारखंड में संतोषी बच्ची की मौत मामले की जांच कराई जाए। दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्यान्न न मिल पाने से वंचित लोगों को भी चिन्हित कराया जाए। उनको राशन दिलवाया जाए। देश भर में कई मामले ऐसे होंगे जहां भूख से तड़प कर लोगों ने जान दे दी है।
Updated on:
16 Nov 2017 09:17 pm
Published on:
16 Nov 2017 09:16 pm
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