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सब्जी का राजा आलू और इतना बुरा हाल, जार-जार रो रहा किसान

नया आलू मंडी में 250 रुपये प्रति कट्टा (50 किलोग्राम) है। किसान को कम के कम 400 रुपये प्रति कट्टा भाव मिलेगा तो लागत निकलती है।

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आगरा

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Amit Sharma

Dec 20, 2017

Potato farmers

आगरा। आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। इस आलू को पैदा करने वाले किसान परेशान हैं। उन्हें खेत में ही आलू फेंकना पड़ रहा है। आलू की लागत तक नहीं निकल पा रही है। कोल्ड स्टोरेज में भी करीब 50 लाख बोरी आलू रखा हुआ है, जो फेंका जा रहा है।

400 की जगह 250 रुपये का भाव मिल रहा
नया आलू मंडी में 250 रुपये प्रति कट्टा (50 किलोग्राम) है। किसान को कम के कम 400 रुपये प्रति कट्टा भाव मिलेगा तो लागत निकलती है। फुटकर में आलू 10 रुपये प्रति किलोग्राम है। खंदौली के किसान अनेक सिंह ने बताया कि भाव न मिलने के कारण आलू किसान खेत से नहीं निकाल रहे हैं। हां, जिन्हें खेत में गेहूं की फसल करनी है, वही आलू खोद रहे हैं। इतनी बर्बादी कभी नहीं हुई है।

कोल्ड स्टोरेज से निकालने पर 15 रुपयि प्रति कट्टा नुकसान
किसान को कोल्ड स्टोरेज में रखे पुराने आलू को निकालने के लिए प्रति बोरी 115 रुपये किराया देना है, जबकि बाजार में भाव 100 रुपये के आसपास है। अब नया आलू आ गया, जो कोल्ड स्टोरेज में जमा किया जाएगा। कोल्ड स्टोरेज स्वामी पुराने आलू को फेंक रहे हैं या स्वयं बेच रहे हैं, ताकि कुछ किराया निकल आए। आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुदर्शन सिंघल के मुताबिक, करीब 50 लाख बोरी आलू कोल्ड स्टोरेज में है। इस आलू को धौलपुर, राजस्थान के साथ-साथ गौशालाओं में भेजा जा रहा है, ताकि किसी के काम आ जाए।

आलू का समर्थन मूल्य घोषित हो
आलू के जानकार गिरधारी लाल गोयल ने बताया कि आलू रखने का सामान्य किराया 115 रुपये प्रति बोरी (50 किलोग्राम) है, लेकिन जब किसान कोल्ड स्टोरेज से लोन लेता है तो किराया 250 रुपये तक पहुंच पाता है। जब बाजार में 100 रुपये का भाव मिलेगा, तो किसान आलू क्यों निकालेगा। इस बीच भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मोहन सिंह चाहर की मांग है कि गेहूं, चावल की तरह आलू का भी समर्थन मूल्य घोषित किया जाए, ताकि लागत तो मिल जाए।