
फाइल फोटो।
अहमदाबाद शरीर के बाहर निकले मूत्राशय की दुर्लभ जन्मजात खामी ब्लैडर एक्स्ट्रोफी से पीड़ित आठ बच्चो की अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पिछले 100 दिनों में जटिल सर्जरी की गई है। निजी अस्पताल में इस सर्जरी और उपचार पर 10 लाख रुपए से अधिक खर्च होते हैं, जबकि सिविल अस्पताल में पूरा उपचार नि:शुल्क किया गया। वर्ष 2009 से अब तक इसके 300 से अधिक जटिल ऑपरेशन किए जा चुके हैं।सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार ब्लैडर एक्स्ट्रोफी में जन्मजात खामी के कारण बच्चे का मूत्राशय शरीर के बाहर रहता है।
यह समस्या करीब 40 से 50 हजार बच्चों में से किसी एक में देखने को मिलती है। लड़कियों की तुलना में लड़कों में इसके मामले अधिक पाए जाते हैं।
पिछले 100 दिनों में किए गए आठ बच्चों के ऑपरेशन में दिल्ली का डेढ़ वर्ष का बच्चा, मुंबई का एक वर्ष का बच्चा, उत्तर प्रदेश की चार वर्षीय बच्ची, गुजरात के डेढ़ से तीन वर्ष की उम्र के चार बच्चे और कच्छ (गुजरात) का आठ वर्षीय बच्चा शामिल है। इनमें पांच बच्चों को सफल सर्जरी के बाद छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि तीन का उपचार चल रहा है।
डॉ. जोशी के अनुसार सर्जरी का उद्देश्य मूत्राशय को शरीर के भीतर स्थापित करने के साथ बच्चे का मूत्र सामान्य रूप से बाहर निकालना और किडनी को सुरक्षित रखना है, ताकि वह आगे सामान्य जीवन जी सके। उपचार और निगरानी में अधिकतम 40 दिन तक लग सकते हैं।
इस उपचार में बाल शल्य चिकित्सा, अस्थि रोग, बेहोशी और नर्सिंग विभाग की टीमें समन्वय से काम करती हैं। डॉ. राकेश जोशी के अलावा डॉ. जयश्री रामजी, प्रोफेसर डॉ. पीयूष मित्तल समेत अनेक चिकित्सकों ने सर्जरी में सहयोग किया।
Updated on:
13 Sept 2026 09:04 pm
Published on:
13 Sept 2026 09:04 pm
