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गुजरात में हृदय संबंधी इमरजेंसी 13.60% बढ़ी, शहर में सबसे ज्यादा 18589 मामले

आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के जनवरी से अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस अवधि में 72,307 हृदय संबंधी इमरजेंसी दर्ज हुईं।
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gujarat news

फाइल फोटो।

Ahmedabad: बदलती जीवनशैली, खान-पान में असंतुलन और शारीरिक गतिविधियों में कमी के बीच गुजरात में हृदय संबंधी इमरजेंसी के मामले बढ़े हैं। आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के जनवरी से अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस अवधि में 72,307 हृदय संबंधी इमरजेंसी दर्ज हुईं। वर्ष 2025 की इसी अवधि में यह संख्या 63652 थी। इस तरह एक साल में 8655 मामले बढ़े और 13.60 फीसदी की वृद्धि हुई।अहमदाबाद में हृदय संबंधी इमरजेंसी के मामले राज्य में सबसे अधिक रहे। शहर में जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान 18,589 मामले सामने आए, जबकि 2025 की इसी अवधि में 18,095 मामले दर्ज हुए थे। यानी अहमदाबाद में 494 मामलों की वृद्धि हुई। इसके बाद सूरत में 5550, राजकोट में 4298, भावनगर में 3872 और वडोदरा में 3592 हृदय संबंधी इमरजेंसी दर्ज हुईं।

108 एंबुलेंस (गुजरात) के जनसंपर्क अधिकारी विकास बिहानी के अनुसार, हृदय संबंधी इमरजेंसी वाले मरीजों को एंबुलेंस सेवा के माध्यम से अस्पतालों तक पहुंचाया गया।

खान-पान, निष्क्रिय जीवनशैली पर नियंत्रण जरूरी

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. लाल डागा के अनुसार, खान-पान में असंयम और शारीरिक सक्रियता की कमी हृदय संबंधी समस्याओं के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर हृदय संबंधी जोखिम को कम किया जा सकता है।

कम उम्र में भी बढ़ रहा खतरा

डॉ. लाल डागा अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियां अब अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही हैं। 40 वर्ष तक की उम्र में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे जीवनशैली और खान-पान में आए बदलाव समेत कई जोखिम कारकों को मानते हैं।

सीने के दर्द को नजरअंदाज न करें

डा. डागा के अनुसार सीने में दबाव या दर्द, दर्द का बांह, कंधे, पीठ या जबड़े तक पहुंचना, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, चक्कर या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी, पर्याप्त नींद तथा रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच से हृदय संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।