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अवैध दस्तावेजों से जमीन, संपत्ति हड़पने वाले गिरोह पर गुजसीटोक का मामला दर्ज

-वासणा पुलिस ने गिरोह के मुख्य सूत्र धार सहित तीन को पकड़ा, एक फरार
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Gujctoc act accused

Ahmedabad. फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों की जमीन व संपत्ति को हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए वासणा पुलिस ने इनके विरुद्ध गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (गुजसीटोक) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

इस गिरोह के मुख्य सरगना सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में सोला पारसनगर निवासी संजय उर्फ नायी उर्फ संजय देसाई मुख्य आरोपी है। वासणा प्रतापकुंज सोसाइटी निवासी सुरेश पंचाल, वासणा अंजली चार रास्ते के पास जय अंबेनगर निवासी दशरथ उर्फ लालाभाई देसाई शामिल हैं। गिरोह का एक और सदस्य महेश वासणा रबारीवास में रहता है। वह फरार है।

पुलिस के अनुसार इस गिरोह के सदस्य बीते करीब 10 साल से सक्रिय हैं। इनके विरुद्ध वासणा थाने में ही छह मामले और अन्य थानों में कई और मामले दर्ज हैं। ऐसे में इनके विरुद्ध गुजसीटोक के तहत प्राथमिकी दर्ज करके कार्रवाई करने की मंजूरी मांगी गई। मंजूरी मिलने पर मामला दर्ज किया और चार में से तीन आरोपियों को पकड लिया है।आरोपी जमीन और संपत्ति को चिन्हित करके और उसके फर्जी दस्तावेज बनाकर उस संपत्ति को बेच देते थे। फिर उस बिक्री दस्तावेज को दिखाकर उस संपत्ति (मकान, दुकान) में रहने वाले व्यक्ति या किराएदार को डरा धमकाकर उससे संपत्ति खाली करवा लेते। उस पर कब्जा कर लेते थे।

इनके विरुद्ध फिरौती, चेन स्नेचिंग, मनी लॉन्डरिंग, आत्महत्या के लिए प्रेरित करने, एट्रोसिटी एक्ट, दंगा, धमकी, ठगी, विश्वासघात, फर्जी दस्तावेज बनाने, नोटरी के फर्जी सिक्का , सही करने,राज्य सरकार के स्टैंप के फर्जी स्टैंप तैयार करने, एक बैंक की फर्जी फ्रेंकिंग मशीन अपने कब्जे में रखने की धाराओं में मामले दर्ज हैं। संजय इस गिरोह का मुख्य सरगना है। इस पर 19 प्राथमिकी दर्ज हैं। इस पर वासणा, घाटलोडिया, सोला, वस्त्रापुर, बोपल, नारणपुरा, जीयू थाने में 19 मामले दर्ज हैं। सुरेश पंचाल पर छह मामले, दशरथ पर तीन मामले दर्ज हैं। महेश देसाई विरुद्ध चार मामले दर्ज हैं।

10 से 20 फीसदी ब्याज वसूलते

वासणा पुलिस अनुसार गिरोह के सदस्य लोगों को ब्याज पर पैसे देते थे। आरोप है कि उस व्यक्ति से 10 से 20 फीसदी जितना ऊंचा ब्याज वसूल करते थे। जो व्यक्ति ब्याज की राशि नहीं दे पाता था। उसे डराते धमकाते, उसकी संपत्ति हड़प करते थे। इस गिरोह की प्रताड़ना से परेशान होकर रवि वंजारा नामक युवक ने आत्महत्या कर ली थी।