
समझौते का आदान प्रदान करते आइआइटी गांधीनगर एवं गुजरात एटीएस के अधिकारी।
Ahmedabad. राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़ी चुनौतियों के तकनीकी समाधान तलाशने के लिए भारतीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइआइटी-गांधीनगर) और गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (गुजरात एटीएस) ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों संस्थान शोध, तकनीक, क्षमता निर्माण और पेशेवरों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।
समझौते पर गुजरात एटीएस के उप महानिरीक्षक सुनील जोशी और आइआइटी गांधीनगर के डीन (आरएंडडी) प्रो. विमल मिश्रा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आइआइटी के निदेशक प्रो. रजत मूना, गुजरात एटीएस के एसपी सिद्धार्थ के. व अन्य प्राध्यापक मौजूद रहे।
एमओयू के तहत संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, विशेष कार्यशालाएं, वेबिनार और छात्रों व कामकाजी पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम होंगे। शोध का फोकस गुजरात एटीएस से जुड़े क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप रहेगा। इसमें दोनों संस्थानों के शोधकर्ता, विषय विशेषज्ञ और पेशेवर मिलकर काम करेंगे।
संस्थान के निदेशक प्रो. रजत मूना ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य शोध और तकनीक को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है। गुजरात एटीएस की व्यावहारिक विशेषज्ञता और संस्थान की शोध एवं अकादमिक क्षमताओं के मेल से समाज से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर काम के अवसर बढ़ेंगे।
गुजरात एटीएस के उप महानिरीक्षक सुनील जोशी ने कहा कि प्रोजेक्ट स्पंदन आधुनिक पुलिसिंग में उन्नत शोध को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। आइआइटी गांधीनगर जैसे संस्थानों के साथ सहयोग से अकादमिक विशेषज्ञता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जमीनी चुनौतियों के बीच की दूरी कम होगी। दोनों संस्थान मिलकर खुफिया जानकारी और डिजिटल जांच के लिए जरूरत के अनुरूप तकनीकी समाधान, उपकरण विकसित कर सकते हैं।
समझौते के तहत गुजरात एटीएस के कर्मचारियों को आइआइटी गांधीनगर के एग्जीक्यूटिव मास्टर्स और अन्य अकादमिक कार्यक्रमों में पेशेवर क्षमता विकास का अवसर मिलेगा। एटीएस के विषय विशेषज्ञ संस्थान के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में विशेष व्याख्यान दे सकेंगे और पाठ्यक्रम तैयार करने में भी सहयोग कर सकेंगे। पात्रता और चयन प्रक्रिया पूरी करने वाले संस्थान के छात्रों को गुजरात एटीएस में इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर मिलेंगे। समझौता प्रभावी तिथि से तीन वर्ष तक रहेगा। इसे आपसी सहमति से बढ़ाया, संशोधित या समाप्त किया जा सकता है।
Updated on:
17 Sept 2026 10:41 pm
Published on:
17 Sept 2026 10:40 pm
