
भावनगर की मिट्टी से बनती है गणपति की मूर्ति
जफर सैयद
वडोदरा. शहर के पूर्व राज परिवार के गणपति की मूर्ति बनाने के लिए भावनगर से मिट्टी लाई जाती है। शहर के राजमहल लक्ष्मी विलास पैलेस में शुक्रवार को भावनगर की मिट्टी के गणपति की मूर्ति स्थापित की गई।
शहनाई के सुरों, भजन-कीर्तन और गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष के साथ गणपति की मूर्ति को पालखी में रखकर राजमहल में ले जाया गया। पूर्व महाराजा समरजीतसिंह गायकवाड, पूर्व महारानी राधिकाराजे, पूर्व राजमाता शुभांगिनीराजे सहित परिवार के सदस्यों ने कोरोना के मद्देनजर सावधानी बरतते हुए गणपति की मूर्ति की स्थापना की।
पूर्व राजवी परिवार के लिए शहर के विख्यात मूर्तिकार चव्हाण परिवार के सदस्य पिछले 81 वर्ष से गणपति की मूर्ति बना रहे हैं। तत्कालीन वडोदरा राज्य के मूर्तिकारों की स्पद्र्धा वर्ष 1936 में आयोजित की गई थी, मूर्ति के चयन के लिए काशी के पंडितों को बुलाया गया था। पूर्व राजवी दरबार में कलाकार का स्थान प्राप्त मूर्तिकार दिवंगत कृष्णराव चव्हाण के हाथों तैयार की गई मूर्ति का चयन किया गया था।
वर्ष 1940 से राजमहल के लिए मूर्ति बनाने वाले चव्हाण परिवार के मूर्तिकार मानसिंह चव्हाण के अनुसार वह अपने भाई लालसिंह, प्रदीपसिंह के साथ राजमहल के लिए मूर्ति बना रहे हैं। दूसरी पीढ़ी के मानसिंह के अनुसार उनकी तीसरी पीढ़ी का उनका पुत्र मंगेश भी राजमहल के लिए मूर्ति बनाने में मदद करता है।
अक्षय तृतीया पर शुरुआत
उनके अनुसार अक्षय तृतीया पर राजमहल से शुभ चौघडिए में गणपति की मूर्ति बनाने के लिए उनके वहां पटिया रखा जाता है। उसी दिन से मूर्ति बनाने की शुरुआत की जाती है। मूर्ति बनाने के लिए भावनगर से मिट्टी लाते हैं। पूर्व राजवियों की ओर से वर्ष 1939 तक पैलेस में चंद्रासुर के वध करते हुए गणपति की मूर्ति बनाई जाती थी। उसी वर्ष पूर्व महाराजा सयाजीराव गायकवाड की ओर से मूर्ति का आकार बदलने का निर्णय किया गया, उस दौरान उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पूर्व महाराजा प्रतापसिंहराव गायकवाड ने मूर्ति का आकार तय करने के लिए वर्ष 1936 में स्पद्र्धा आयोजित की थी।
Published on:
10 Sept 2021 10:40 pm
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