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‘चीन गैस’ की पुड़िया से पकाए जा रहे आम सेहत के लिए खतरनाक! जानिए प्राकृतिक और कैमिकल से पके आम की पहचान

राजस्थान में बड़ी मात्रा में आमों को तथाकथित ‘चीन गैस’ की पुड़िया रखकर पकाया जा रहा है। इससे आम जल्दी पीले और आकर्षक दिखने लगते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए खतरनाक मान रहे हैं। जानिए प्राकृतिक और कैमिकल से पके आम की पहचान-

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chemically ripened mangoes

किशनगढ़. मुख्य बाजार में बॉक्स में रखे आम को पकाने के लिए बीच में रखी रासायनिक गैस की पुड़िया।

मदनगंज-किशनगढ़। गर्मी बढ़ने के साथ आम की बहार आ गई है। बाजारों, फल मंडियों और ठेलों पर अलग-अलग किस्मों के आमों की भरमार है, लेकिन मिठास और जल्दी पकाने की होड़ में अब फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने का खेल भी तेज हो गया है। राजस्थान में बड़ी मात्रा में आमों को तथाकथित ‘चीन गैस’ की पुड़िया रखकर पकाया जा रहा है। इससे आम जल्दी पीले और आकर्षक दिखने लगते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे लोगों की सेहत के लिए खतरनाक मान रहे हैं।

किशनगढ़ के बाजारों में इस समय बादाम, तोतापुरी, दशहरी, केसर, लंगड़ा, हापुस और सियार सहित कई किस्मों के आम बिक रहे हैं। इनमें सबसे अधिक मांग बादाम आम की बनी हुई है। जूस सेंटर संचालक भी बड़ी मात्रा में इसी किस्म के आम खरीद रहे हैं, क्योंकि इसमें गूदा अधिक और स्वाद मीठा होता है। बढ़ती मांग के चलते कई व्यापारी फलों को जल्दी पकाने के लिए रासायनिक प्रक्रिया अपना रहे हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच अभियान की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

बादाम आम की सबसे ज्यादा मांग

फल विक्रेताओं के अनुसार इस बार बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री बादाम आम की हो रही है। जूस बनाने वाले दुकानदार भी इसी किस्म को प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्तमान में बादाम आम करीब 100 रुपए में डेढ़ किलो तक बिक रहा है।

वहीं तोतापुरी आम 100 रुपए में लगभग दो किलो, केसर आम करीब 120 रुपए प्रति किलो तथा हापुस आम 300 रुपए किलो तक पहुंच गया है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों की पहली पसंद मीठा और जल्दी पकने वाला आम बन चुका है, जिसके कारण कृत्रिम पकाने की प्रक्रिया बढ़ती जा रही है।

तीन दिन में तैयार हो रहे आम

व्यापारियों के मुताबिक प्राकृतिक रूप से आम पकने में अधिक समय लगता है, लेकिन बाजार की मांग को देखते हुए आमों को तीन दिन में तैयार किया जा रहा है। इसके लिए आम की पेटियों में ‘चीन गैस’ नाम से बाजार में मिलने वाली पुड़िया रखी जाती है। इससे आम तेजी से पकते हैं और उनका रंग आकर्षक पीला दिखाई देता है। हालांकि कई बार फल ऊपर से पके नजर आते हैं, लेकिन अंदर से कच्चे रह जाते हैं। वहीं केले को पकाने में करीब पांच दिन का समय लिया जा रहा है।

रोजाना हजारों किलो आम की खपत

गर्मी बढ़ने के साथ शहर में आम का कारोबार चरम पर पहुंच गया है। एक ठेले या दुकान पर प्रतिदिन करीब 150 से 200 किलो तक आम बिक रहे हैं। शहर में करीब 150 से 200 फल विक्रेता, ठेला संचालक और दुकानदार आम की बिक्री कर रहे हैं। ऐसे में प्रतिदिन हजारों किलो आम की खपत हो रही है। जूस सेंटरों की मांग अलग से बढ़ने के कारण कारोबार और तेज हो गया है।

ऐसे पहचानें प्राकृतिक रूप से पका आम

  • प्राकृतिक रूप से पके आम में खुशबू अधिक होती है।
  • कृत्रिम रूप से पके आम ऊपर से पीले लेकिन अंदर से कच्चे हो सकते हैं।
  • अत्यधिक चमकदार और एक समान रंग वाले आमों से सावधानी बरतनी चाहिए।
  • उपयोग से पहले फलों को गुनगुने पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।

इनका कहना है….

रासायनिक माध्यमों से पकाए गए फल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे फलों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका रहती है। इसलिए फल खरीदते समय सावधानी बरतें और फलों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग में लें।

  • डॉ. परसाराम चौधरी, पीएमओ, राजकीय यज्ञनारायण जिला चिकित्सालय किशनगढ़

फल और सब्जी मंडियों में लगातार अभियान चला कर कार्रवाई की जाती है। अत्यधिक रासायनिक पदार्थों के जरिए फल सब्जी को पका कर बेचा जा रहा है तो यह गलत है और नुकसानदायक है। जल्द किशनगढ़ में भी अभियान चला कर ऐसे विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी।

  • दीपक कुमार, एफएसओ, सीएमएचओ अजमेर।