
illegal drug-wine supply
अजमेर.
खुशनुमा मौसम, हरियाली और अरावली पर्वतश्रंखला से घिरे अजमेर को कुदरत ने वास्तव में खूबसूरती से नवाजा है। इससे महज 11 किलोमीटर दूर पुष्करराज में प्रजापिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। मुगल बादशाहों और अंग्रेजों को भी यह शहर की आबोहवा, हरियाली, पुरवइयां और दिलकश नजारे बहुत पसंद आते था। लेकिन वक्त के साथ अजमेर के इन नैसर्गिक गुणों को नजर लग गई है। मादक द्रव्यों का अड्डा, गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त अपराधियों का आश्रय स्थल, दिन-दहाड़े गोलीबारी, लूट-पाट और गैंगवार जैसे अवगुणों ने अजमेर की छवि को बदनुमा बना दिया है।
पढ़ाई-लिखाई से दूर खानाबदोश किशोर और नौजवानों को व्हाइटनर, अफीम, गांजा, हेरोइन ने अपने शिकंजे में जकड़ लिया है। अब तो स्कूल, कॉलेज में पढऩे वाली पीढ़ी भी इसकी चपेट में है। दरगाह-तारागढ़ से सटा इलाका, पुष्कर और अन्य इलाके मादक पदार्थों के काले कारोबार में तब्दील हो गए हैं। कारोबारी युवा पीढ़ी को बैखौफ नशीले पदार्थ परोसने से नहीं चूक रहे।
आसानी से मदिरा मिल जाती
गाहे-बगाहे पुलिस, नाराकोटिक्स विभाग धरपकड़-अभियान चलाते हैं, पर कारोबारी और नशाखोर परवाह नहीं करते। रात के अंधियारे से दिन के उजाले तक कारोबार फिर चल पड़ता है। कुछ यही हाल शहर के मयखानों का है। सरकारी फरमान में रात 8 बजे बाद मदिरा बेचने पर पाबंदी है। लेकिन अजमेर के शराब कारोबारी 24 घंटे सेवा को तत्पर हैं। उन्होंने अपनी दुकानों-मयखानों और अड्डों में खास ‘खिड़कियां ’ बना रखी हैं। नशेड़ी जब चाहे तब आसानी से मदिरा मिल जाती है।
अवैध परिवहन जारी
हरियाणा, पंजाब और हिमाचलप्रदेश में निर्मित शराब भी यहां आसानी से पहुंच रही है। ट्रक, स्लीपर बस-कोच और अन्य वाहनों से प्रतिमाह लाखों-करोड़ों रुपए की मदिरा का अवैध परिवहन जारी है। आबकारी विभाग-पुलिस की निगाह पड़ी तो पकड़ा-धकड़ी हो जाती है। वरना सबकुछ सामान्य दिखता है।
कभी देश-प्रदेश की उत्कृष्ट शैक्षिक नगरी रहे अजमेर का यह स्वरूप बेहद पीड़ादायक है।
अपराधियों की शरणस्थली जैसी तोहमत
जिस शहर में मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी रोशनआरा-जहांआरा ने दरगाह के फर्श के कई मर्तबा साफ किया। प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. सी. वी. रमन और खडग़वासला स्थित एनडीए के प्रथम प्राचार्य जेटीएम गिब्सन जैसी हस्तियों ने सेवाएं दी। बॉलीवुड के नामचीन फिल्म निर्देशक महबूब यहां बरसों तक रहे। संगीतकार-गायक ए.आर. रहमान ने भी घरौंदा खरीदा है। ऐसे शहर पर नशे और हथियार की मंडी, भू-माफियाओं के गढ़, अपराधियों की शरणस्थली जैसी तोहमत लग रही है।
अजमेर के हालात पर कई बार चिंता
हालांकि प्रशासन और पुलिस ने कई घटनाओं में लिप्त अपराधियों को पकड़ा है। चर्चित घटनाओं का खुलासा भी किया है। लेकिन तेजी से फलते-फूलते नशीले कारोबार के आगे यह कुछ मायने नहीं रखती। किशोरवय पीढ़ी, युवाओं को नशे के दलदल से दूर रखना बड़ी चुनौती है। खुद राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग अजमेर के हालात पर कई बार चिंता चुका है। सरकार ,प्रशासन, स्वयं सेवी संस्थाएं और गैर सरकारी संगठन मुद्दे उठाते हैं।
सबकुछ खुलेआम मुहैया
फिर भी काला कारोबार शहर में फर्राटे से दौड़ रहा है। कुछ बरस पहले तक नशेड़ी-कारोबारी चोरी-छिपे यह काम करते थे। अब सबकुछ खुलेआम मुहैया कराया जाता है।
हालात बेकाबू हों उससे पहले पाल बांधने की जरूरत है। आम जनता को भी जागरुक होना पड़ेगा। युवाओं-किशोरों और नशेडिय़ों को दलदल से बाहर निकालने के अलावा काले कारोबार की कमर तोडऩी होगी। पुलिस और प्रशासन को भी इससे कतराने के बजाय आगे बढकऱ मदद लेनी होगी।
Published on:
13 Nov 2018 06:33 am
