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Big issue: इसकी खूबसूरती के दीवाने थे जहांगीर और नूरजहां, देखें क्या हाल कर दिया इस झील का

यही कारण है कि वर्तमान में यहां का पानी पीने लायक तो दूर नहाने के मापदंड भी पूरे नहीं कर रहा।
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water pollute in lake

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अजमेर

राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में चयनित अजमेर शहर की आनासागर झील के पानी में तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदूषण बढ़ रहा है। इस बात का अन्दाजा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट देखकर लगाया जा सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण गंदे नाले-नालियों का पानी झील में आना है और यही कारण है कि वर्तमान में यहां का पानी पीने लायक तो दूर नहाने के मापदंड भी पूरे नहीं कर रहा।

यहां पर भले ही मछली पालन किया जा रहा हो, लेकिन जांच रिपोर्ट के मुताबिक तो यहां का पानी मछली पालन के लिए भी उपयुक्त नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से हर तीन माह में अजमेर जिले की आनासागर झील, किशनगढ़ की गुंदोलाव झील व पुष्कर सरोवर के पानी की जांच की जाती है। इस पानी की 29 प्रकार की जांच की जाती है।

आनासागर झील का पानी प्रदूषित है और निर्धारित मापदंड के मुताबिक पीने योग्य, नहाने योग्य व मछली पालन के योग्य नहीं है। बोर्ड की ओर से हर तीन माह में पानी की जांच कर रिपोर्ट तैयार करवाई जाती है।
-डॉ.कृति शर्मा, वैज्ञानिक अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय किशनगढ़

झील में कपड़े धोने पर लगी पूर्ण पाबंदी

नगर निगम एवं जिला प्रशासन अजमेर ने आनासागर झील में कपड़े धोने वाले धोबियों पर पूर्ण पाबंदी लगा दी। आनासागर झील में कपड़े धोकर व गंदा पानी झील में ही प्रवाहित होने के कारण जलीय जीव जंतु को हानि हो रही थी एवं जल प्रदूषण बढऩे रहा था। नगर निगम आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तोपदड़ा स्थित धोबी घाट में आवश्यक सुविधाएं पाइपलाइन, घाट की मरम्मत इत्यादि कार्य पूर्ण करवा दिए।

उपायुक्त राजेन्द्र सिंह रलावता ने बताया कि आनासागर झील में कपड़े धोने वाले सभी धोबियों को व्यक्तिगत रूप से पाबंद कर तोपदड़ा धोबी घाट में कपड़े धोने हेतु निर्देशित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति आनासागर झील में कपड़े धोता अथवा झील में किसी भी प्रकार की गंदगी करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ झील संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।