
ptet-bstc 2019
अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय को प्री. टीचर एज्यूकेशन टेस्ट और बीएसटीसी प्रवेश पूर्व परीक्षा-2019 की जिम्मेदारी मिलना मुश्किल है। अव्वल तो कुलपति के कामकाज पर रोक लगी है। तिस पर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय को नोडल एजेंसी बनाना आसान नहीं है।
प्रदेश में प्रतिवर्ष दो बीएड बीएड सहित चार वर्षीय बीएससी बीएड और बीए बीएड पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्री. टीचर एज्यूकेशन टेस्ट का आयोजन होता है। इसी तरह बीएसटीसी संस्थानों में दाखिलों के लिए प्रवेश पूर्व परीक्षा कराई जाती है। इसके लिए सरकार किसी विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज को नोडल एजेंसी बनाती है। सत्र 2018-19 में बीएड पाठ्यक्रमों में दाखिलों के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने प्रीबीएड और बांसवाड़ा के गोविंद गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय ने बीएसटीसी प्रवेश पूर्व परीक्षा कराई थी। अब सत्र 2019-20 के लिए यह परीक्षा कराई जानी है।
विश्वविद्यालय की मुश्किलें
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में बीते ढाई महीने से कुलपति के कामकाज पर रोक लगी हुई है। इसके अलावा प्रदेश में कांग्रेस सरकार बन चुकी है। कुलपति की गैर मौजूदगी में विश्वविद्यालय को पीटीईटी अथवा बीएसटीसी प्रवेश पूर्व परीक्षा देना मुश्किल है। ऐसा हुआ तो विश्वविद्यालय के हाथ से अहम प्रतियोगी परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी चली जाएगी। मालूम हो कि विश्वविद्यालय 1992-93 के अलावा 1998-99, 2005 से 2007 और 2015, 2017 और 2018 में पीटीईटी, 2007, 2016 में बीएसटीसी परीक्षा करा चुका है।
कांग्रेस सरकार पर निगाहें
प्रदेश में कांग्रेस सरकार सत्ता संभाल चुकी है। प्री.टीचर एज्यूकेशन टेस्ट और बीएसटीसी प्रवेश पूर्व परीक्षा-2019 के आयोजन और नोडल एजेंसी को लेकर विभिन्न संस्थाओं की नजरें टिकी हैं।
Published on:
07 Jan 2019 06:34 am
