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Bus Accident: वो सरहद पर लडऩा चाहता दुश्मनों से, काल ने छीन लिया एक जांबाज सैनिक

दस्तावेज लेकर अपने पिता के साथ जयपुर रवाना हो गया ताकि जल्द नौकरी ज्वॉइन कर सके, मगर यह सपना अधूरा रह गया।
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अजमेर

बचपन से ही फौज में जाकर देश की सरहद पर दुश्मनों से लोहा लेकर भारत माता की सेवा करने का सपना संजोया। किशोरावस्था में खूब शारीरिक परिश्रम किया, दौड़ लगाई, मेहनत कर पसीना बहाया। अजमेर में विगत महीनों कायड़ में सेना भर्ती रैली में फौजी के रूप में चयन भी हो गया। रविवार को दस्तावेज लेकर अपने पिता के साथ जयपुर रवाना हो गया ताकि जल्द नौकरी ज्वॉइन कर सके, मगर यह सपना अधूरा रह गया। सड़क हादसे में फौजी बनने वाले दिलीप सिंह रावत की मौत हो गई।

अजमेर में तबीजी पुलिया के पास सड़क हादसे में राजसमन्द जिले की भीम तहसील के हीरा का बाडिय़ा निवासी दिलीप सिंह रावत (18) की मौत के बाद उसके परिजन व उसका दोस्त बादनी (राजसमंद) निवासी आनंदसिंह (18) भावुक हो गए और फफक फफक कर रो पड़े।

आनन्दसिंह का भी फौज में चयन हुआ था। अजमेर के कायड़ विश्रामस्थली में मई माह में भर्ती के दौरान दिलीप के साथ उसका भी चयन हुआ। दोनों जयपुर सेना कार्यालय में दस्तावेज जमा करवाने के लिए रवाना हुए थे। आनंद सिंह के भी एक आंख में गंभीर चोट लगी। आनन्द के अनुसार जबकि दिलीप सिंह के पिता भी गंभीर रूप से हादसे में घायल हो गए।

कहां हो जीशान के पापा.......

अजमेर. काल बनकर आए डम्पर की तबीजी में पाली आगार की रोडवेज बस से भिड़ंत में बस में सवार बेटे के सिर में गंभीर चोट लगी, खून बह चला मगर मां ने हाथ टूटने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। उसने बेटे को गोद में लेटाया, चोट से बह रहे खून को रोकने का प्रयास किया। बेटे को उठाने का प्रयास किया। बेटे का नाम पुकारती रही मगर वह तब बोलता जब उसमें जान होती। काल के क्रूर हाथों ने मां की गोद में सिर रखे बेटे को अपनी ओर खींच लिया। मां बार-बार यही कहती रही कि वह बेटे के लिए कुछ नहीं कर सकी।
जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में गंभीर घायलों का एक ओर इलाज चल रहा था वहां मोर्चरी में एक-एक कर छह शव सुरक्षित रखवाए गए। इनमें एक शव सोजतसिटी निवासी मोहम्मद जीशान (18) पुत्र मोहम्मद सईद का भी था। वह अपने पिता सईद, माता सायरा, दो बहनों शाहीन व सिमरन के साथ ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह जियारत के लिए रोडवेज बस में अजमेर आ रहे थे।

अजमेर सीमा में घुसने के चंद पलों में ही सड़क हादसे में जीशान की मौके पर मौत हो गई जबकि पिता सईद गंभीर घायल हो गए, जो वेंटीलेटर पर हैं। अस्पताल में विलाप करती सायरा को करीब डेढ़ घंटे तक यही बताया गया कि जीशान व सईद का इलाज चल रहा है।

मगर जब परिवार के अन्य लोग व जीशान के चाचा पहुंचे तो बताया कि जीशान अब दुनिया में नहीं रहा। ये सुनते सायरा अपनी दोनों बेटियों का बांहों में भरकर फूट-फूट कर रो पड़ीं। बिलखती मां के यही बोल फूट रहे थे...जीशान के पापा तुम कहां हो.. तुम्हारा जीशान अब दुनिया में नहीं है...। शाहीन बिलखती हुए अपने भाई को पुकार रही थी...एक बार आ जाओ जीशान.. अब हमारा भाई नहीं है। एक भाई बीस साल पहले खत्म हो गया अब एक और भाई भी चल बसा।

दसवीं में आए थे 80 प्रतिशत

जीशान पढ़ाई में होशियार था। हाल ही दसवीं की परीक्षा में उसने स्कूल में टॉप किया। शाहीन के अनुसार जीशान के 80 प्रतिशत से अधिक अंक आए थे। वे लोग परिवार के साथ सब ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत करने आ रहे थे।