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डूब क्षेत्र में ही काट दी कॉलोनियां

नगर निगम, एडीए और हाउसिंग बोर्ड की अनदेखी पड़ रही है भारी अब पानी भरने से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं मकान मालिक
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अजमेर.शहर में बारिश के कहर ने एक बार फिर नगर निगम(nagar nigam),अजमेर विकास प्राधिकरण तथा हाउसिंग बोर्ड (housing bord)और भू- माफियाओं की सांठगाठं की परतंे उधेडक़र रख दी हैंं। तेज बारिश के कारण आनासागर झील के किनारे बसी कॉलोनियों में पानी भरने के बाद एक बार फिर से यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर डूब क्षेत्र में इन कॉलोनियों को मंजूरी कैसे मिली। बरसाती पानी में अपने आशियानों को नष्ट होते देख रहे मकान मालिक खुद को लुटापिटा महसूस कर रहे हैं। अजमेर में दशकों से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा आम है कि आनासागर डूब क्षेत्र में सरकारी व गैर सरकारी कॉलोनियों की मंजूरी में बड़ा ‘खेल’ हुआ था। डूब क्षेत्र में सैकड़ों मकान,मॉल, कई होटल, दर्जनों दुकानें और अन्य व्यवसायिक व गैर व्यवसायिक संस्थानों को मंजूरी मिली थी। तब से हर साल कॉलोनियों में पानी भरने के साथ नियमों को ताक पर रखने की चर्चा होती रही लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अफसर, नेता या भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। पिछले सप्ताह हुई बारिश के चलते आनासागर के किनारे कई कॉलोनियों में लोग तीन-चार दिन तक अपने ही घरों में बंधक बने रहे।
यह कॉलोनियां डूब क्षेत्र में Colonies cut in submerged area

आनासागर (anasagar)के किनारे महावीर कॉलोनी, नवगृह कॉलोनी, अरिहंत कॉलोनी को डूब क्षेत्र में मान लिया गया। जबकि करणी विहार, सागरविहार,अशोक विहार, गुल मोहर कॉलोनी, अम्बेडकर बस्ती, मांगी लाल साहू का कुंआ,वन विहार तथा आना सागर सर्कुलर रोड से झील की ओर वाली कॉलोनी भी आनासागर डूब क्षेत्र में है।
हाउसिंग बोर्ड ने काटी कॉलोनी

हाउसिंग बोर्ड जिसका खुद कार्यालय भी वैशाली नगर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ही उसने भी इस डूब क्षेत्र में कॉलोनी काटते हुए आवास निर्माण कर आवंटित कर दिए। अब यहां रहने वाले लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
एडीए की जमीन पर बहुमंजिली इमारते

आना सागर के किनारे पाल से लगता हुआ एडीए का वैशाली नगर-सी ब्लॉक है। यहां पर लोगों ने मकान के साथ ही बहुमंजिली भवन भी बना लिए हैं। एडीए ने खातेदारी जमीनों का नियमन भी कर दिया। टाउन प्लानिंग विभाग ने मंजूरी जारी की।
नगर निगम

नगर निगम ने आनासागर व आसपास के डूब क्षेत्र में जमकर नक्शे पास किए। इसी कर नतीजा है कि आनासागर के किनारे चारो तरफ मकान ही-मकान नजर आ रहे हैं।
12 महीने पम्प से निकालते हैं पानी

सागर विहार, गुल मोहर कालॉनी व आना सागर के किनारे की कॉलोनियों में आनासागर के सीपेज का पानी जमा होता रहता है। इसके अलावा घरों की नालियों की पानी की निकासी भी किसी बड़े नाल में न हो कर पानी के पास ही गड्ढे में जमा होता है। इस पानी को 12 महीने ही 2 मडपम्प चलाकर निकालना पड़ता है। बरसात में स्थिति विकट हो जाती है पानी निकासी का मार्ग नहीं होने के कारण कॉलोनियों में पानी भरने लगता है।
पॉश इलाका तब्दील हो जाता है क"ाी बस्ती में

सागर विहार, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, गुलमोहर कॉलोनी व आसपास की कॉलोनी शहर की सबसे पॉस कॉलोनियों में शुमार होती हैं। बड़े-बड़े बंगले, कॉम्पलेक्स के जरिए यह धनाढ्यों की कॉलोनी कहलाती है। शहर के प्रमुख डॉक्टरों व अफसरों के ढिकाने भी यहीं है। लेकिन बरसात के चार महीनों में जब यहां पानी भर जाता है तो कॉलोनियों का हाल बदतर हो जाता है। पानी उतरने के बाद भी घरों में साल भर सीलन बनी रहती है। लगातार पानी भरने से मकानों को भी खतरा उत्पन्न हो रहा है नींव कमजोर हो रही है।

इनका कहना है...
हमें कहा किया कि अंडरग्राउंड नाला बनाया जाएगा, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। मकान कमजोर हो रहे हैं। पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। पम्पों की संख्या बढ़ाई जाए यह 12 महीने ही लगे रहने चाहिए।

गजेन्द्र पंचोली, अध्यक्ष, हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-3 विकास समिति वैशाली

क्षेत्र में जलभराव की समस्या है। आनासागर झील का पानी पहले ही रिसकर आता रहता है। झील की पाल भी मजबूत नहीं है यह ढह गई तो बड़ी जनहानि हो सकती है। जब यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं था तो कॉलोनी नहीं काटनी चाहिए थी।
किशन गोपाल अग्रवाल, सेक्टर-1 विकास समिति वैशाली

तेज बरसात होने से जहां शहर के अन्य क्षेत्र में लोग खुश होते हैं और सडक़ों पर निकलते हैं वहीं सागर विहार क्षेत्र में दूसरा ही माहौल बनने लगता है। लोगों को क्षेत्र में पानी भरने की चिंता सताने लगाती है।
गोविंद अग्रवाल, क्षेत्रवासी, सागर विहार

सिल्ट जाम होने के कारण जमीन ऊं ची हो गई। इस कारण यहां कॉलोनियों काटी गई। यह गलत निर्णय था। आनासागर में मिट्टी डालकर अतिक्रमण कर प्लॉट काटे जा रहे हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
धर्मेश जैन, अध्यक्ष, आनासागर बचाओ समिति

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