
social distancing in exam
अजमेर.
कोरोना वायरस संक्रमण और लॉकडाउन से कई बदलाव देखने को मिलेंगे। रख दी है। आगामी तीन से चार महीने तक भर्ती और वार्षिक परीक्षाओं, कक्षाओं और कार्यक्रमों में लोगों को अपनी आदतें बदलनी पड़ेंगी। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सेनिटाइजर का इस्तेमाल सबसे अहम है।
कोरोना संक्रमण से हजारों लोग जान गंवा चुके हैं। देश में 3 मई लॉकडाउन घोषित किया गया है। इसने शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक संस्थानों के कार्यक्रमों में बदलाव की शुरूआत कर दी है। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों, सरकारी दफ्तरों के अधिकारियों-कार्मिकों और आमजन को इसकी पालना करनी होगी।
परीक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग
आरपीएससी की पुस्तकालय एवं भाषा विभाग, पशुपालन विभाग, प्राध्यापक संस्कृत शिक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाएं होनी हैं। सीबीएसई, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं-बारहवीं, मदस विश्वविद्यालय, राजस्थान और बीकानेर टेक्निकल यूनिवर्सिटी की सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाएं होनी हैं। इनमें 50 लाख से ज्यादा विद्यार्थी, युवा, अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा और भर्ती संस्थानों को अतिरिक्त कमरों-टैंट की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
समारोह में होंगे बदलाव
मई-जून से दिसंबर तक शैक्षिक संस्थानों में सेमिनार-वर्कशॉप, दीक्षांत समारोह, वर्षिकोत्सव और सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रम होने हैं। संस्थाओं को पूर्व की भांति भीड़ जमा करने की प्रवृत्ति छोडऩी होगी। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना जरूरी होगा। समारोह स्थल-हॉल और कमरों को सेनेटाइज्ड कराना होगा।
कम करनी होगी परिवहन साधनों में भीड़
भारत में निजी सरकारी बसों में 50 लाख, रेलवे में 3.5 करोड़ यात्री रोजाना सफर करते हैं। सिटी कैब, टेम्पो, ऑटो में भी 10 हजार से 5 लाख लोग यात्रा करते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते परिवहन साधनों और बाजार में भीड़ कम करनी होगी। लोगों को सीमित यात्रा और बेवजह बाजार जाने की आदत बदलनी पड़ेगी। मास्क पहनना जरूरी होगा।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, सफाई और सेनिटाइजिंग सबसे अहम हैं। परीक्षाओं, कक्षाओं और समारोह में यह बदलाव करने जरूरी होंगे। तभी सब स्वस्थ रह सकेंगे।
डॉ. ऋतु सारस्वत, रीडर समाजशास्त्र राजकीय महाविद्यालय
Published on:
18 Apr 2020 09:29 am
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