
online teaching
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
कोरोना लॉकडाउन से देश की आर्थिक, शैक्षिक, भर्ती और अन्य गतिविधियां भले ठप हों, लेकिन इसने कई मायनों में नवाचार की राह खोल दी है। खासतौर पर विभिन्न भर्तियां और सालाना परीक्षाएं कराने वाली संस्थानों को इससे काफी फायदा मिल सकता है। संस्थाएं ऑनलाइन कामकाज, ई-कंटेंट और ई-लर्निंग पर निर्भरता बढ़ाएगी।
आईआईटी, आईआईएम, यूजीसी, सीबीएसई सहित कई संस्थानों ने इसकी तरफ कदम भी बढ़ा लिए हैं।लॉकडाउन के चलते देशभर में कॉलेज-यूनिवर्सिटी और बोर्ड की परीक्षाएं प्रभावित है। संघ लोक सेवा आयोग और विभिन्न राज्यों के आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंक, कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाएं ठप हैं। आर्थिक और वाणिज्यिक कारोबार नहीं हो रहा। विपरीत परिस्थितियों में देश भर की संस्थानों के लिए नवाचार की राह खुल गई है। इसी साल से धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिलेंगे।
शुरू हुए ई-लर्निंग प्रोसेस
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दीक्षा प्लेटफार्म पर ई-कंटेंट लॉन्च किए हैं। सीबीएसई के स्कूल सहित कॉलेज और यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत विद्यार्थी-शिक्षक इसका फायदा उठा रहे हैं। इनमें केजी से स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक विद्यार्थी शामिल हैं। विद्यार्थियों और युवाओं के लिए मोबाइल मददगार साबित हो रहे हैं।
यह हो सकते हैं शिक्षा में बदलाव....
-देशभर में स्कूल तैयार कर रहे ऑनलाइन लेक्चर और नोट्स
-कॉलेज शिक्षक बना रहे विषयों के ऑनलाइन वीडियो लेक्चर
-विद्यार्थियों के लिए तैयार कर रहे पावर पॉइन्ट प्रजन्टेशन
-केंद्रीय और राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटी तैयार कर रहे ई-कंटेंट
-ऑनलाइन सिलेबस, लुघ स्तरीय ई-केप्स्यूल कोर्स
भर्ती संस्थानों में हो सकते हैं ये नवाचार
-यूपीएससी सहित राजस्थान लोक सेवा आयोग कर सकते हैं कई ऑनलाइन परीक्षा की शुरुआत
-अभ्यर्थियों के दस्तावेज सहेजने के लिए डिजिटल लॉकर
-कार्यालय में ई-फाइलिंग सिस्टम -अधिकारियों
-कर्मचारियों के लिए वर्क टू होम कल्चर को बढ़ावा
-ई-पाठ्यक्रम, ई-फॉर्म, कॉपियों की ई-चैकिंग व्यवस्था
अभी गिनती के हैं ऑनलाइन कोर्स
एनिमेशन, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेस, ग्रीन एनर्जी, मास कम्यूनिकेशन, जियोलॉजी, डिप्लोमा इन एन्वायरमेंट, बैंकिंग एन्ड इंश्योरेंस, इंग्लिश स्पोकन, सटिफिकेट इन एकाउंटिंग, ह्मयून रिसोर्स और रिटेल मैनेजमेंट-सर्टिफिकेट इन एकाउन्टेंसी एन्ड टेक्सेशन और अन्य
आने वाला भविष्य तकनीक और डिजिटल वल्र्ड का है। ई-कंटेन्ट, ई-लेक्चर तैयार करने के लिए अभी देश की संस्थानों के लिए सुनहरा अवसर है। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी भविष्य का रोडमैप बना सकती हैं। यह विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
प्रो. एम.एम. सालुंखे, कुलपति भारतीय विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी पुणे
लॉकडाउन और वैश्विक संकट से हम वाकिफ हैं। देशभर की भर्ती और शैक्षिक संस्थानों में नवाचार का वक्त है। ऑनलाइन कामकाज, ई-लेक्चर, ई-कोर्स, ई-तकनीक अब वक्त की मांग हैं। गांवों तक इसका विस्तार होना चाहिए। इसी से ग्लोबल विलेज की अवधारणा विकसित होगी।
प्रो. पी. सी. त्रिवेदी, कुलपति जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी जोधपुर
Updated on:
07 Apr 2020 09:01 am
Published on:
07 Apr 2020 09:01 am
