
couple arrest for forcing suicide
अपर जिला न्यायाधीश उत्पीडऩ (मामलात) अदालत की न्यायाधीश नुसरत बानो ने आत्महत्या के लिए उकसाने के तेरह साल पुराने मामले में अभियुक्त दंपती को छह वर्ष के कारावास व प्रत्येक पर पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियुक्त पर घरेलू विवाद के चलते आए दिन कहा-सुनी व तनाव का माहौल पैदा करने का आरोप था। इससे परेशान होकर विजय गर्ग ने सेल्फोज की गोलियों का सेवन कर लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मृतक के बड़े भाई अजय गर्ग व उसकी पत्नी सीमा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चालान पेश किया।
प्रकरण के तथ्य
परिवादी निरंजना गर्ग ने पुलिस थाना नसीराबाद में 15 फरवरी 2004 को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि उसका विवाह वर्ष 1991 में विजय गर्ग से हुआ। उसके पति विजय ने जेठ अजय को संपत्ति खरीदने के लिए रकम दी, उसके बाद कुछ दस्तावेज भी लिखवाए गए। विजय ने 4 से 5 लाख रुपए खर्च कर मकान बनवा लिया।
कुछ समय बाद ससुराल वालों ने पति को आर्थिक मदद देना बंद कर दिया और उसे मकान खाली करने के लिए परेशान करने लगे। गाली गलौच व झगडे़ से उसका पति तनाव में रहने लगा और अपना काम धंधा भी नहीं कर पा रहा था। इसके बाद विजय ने कुछ गोलियां खा लीं और दरवाजा बंद कर लिया। परिवादी ने पड़ोस की मदद से उसके पति को अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी मौत हो गई।
अदालत ने आरोपित अजय व सीमा के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ओर सरकारी वकील शशिप्रकाश इंदौरिया व परिवादी के वकील एस.एन. रिझवानी ने 14 गवाह व 20 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने आरोपित दंपती को कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई।
Published on:
11 May 2017 05:13 am
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