
#COVID-19 लॉकडाउन से अजमेर में अपराध का ग्राफ 'डाउन
मनीष कुमार सिंह
अजमेर. जिलेभर में चल रहे लॉकडाउन और अजमेर शहर के चार पुलिस थानों में कफ्र्यू के बाद अपराध का ग्राफ जमीन पर आ चुका है। जहां रोजाना औसत 40 से 50 मुकदमे दर्ज होते थे, वहां चौबीस घंटे में अब तो सिर्फ एक-दो प्रकरण ही दर्ज हो रहे हैं। इसमें भी अधिकांश लॉकडाउन का उल्लंघन व वाहन चोरी के मुकदमे शामिल है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर 22 मार्च को पहले जनता कफ्र्यू व फिर 23 मार्च से देशभर में लॉकडाउन के बाद अजमेर जिले में अपराध का ग्राफ भी 'डाउनÓ हो गया है। अजमेर जिले में महिला थाना समेत 35 पुलिस थाने हैं। यहां औसतन 8-9 मुकदमे दर्ज से किए जाते रहे हैं लेकिन लॉकडाउन और कफ्र्यू के बाद आईपीसी से जुड़े गंभीर अपराध में तेजी से कमी आई है। लॉकडाउन के दस दिन में जिलेभर के 35 पुलिस थानों में 64 मुकदमे हुए है जो प्रति थाना औसत 2 से भी कम है। खास बात यह है कि लॉक डाउन में हत्या, लूट, नकबजनी, बलात्कार, आत्महत्या व एक्सीडेंट जैसे मामलों में कमी आई है। जबकि दर्ज हुए 64 मुकदमों में से करीब आधा दर्जन लॉकडाउन का उल्लंघन पर दर्ज की गई है।
बाइक चोरी की वारदातें
लॉकडाउन के दौरान अजमेर शहर में सर्वाधिक वारदाते दुपहिया वाहन चोरी की पेश आई है। घरों में लोगों के मौजूद होने के बाद भी सड़क, चौराहों, गलियों में खड़े दुपहिया वाहन पर चोर हाथ साफ कर गए। इसमें सर्वाधिक क्लॉक टावर, सदर कोतवाली थाना क्षेत्र शामिल है।
अवैध शराब की बिक्री
लॉकडाउन में अपराध में कमी का एक बड़ा कारण शराब की बिक्री भी है। हालांकि शराब के ठेकों से भले बिक्री बंद हो गई लेकिन कच्ची बस्तियों के आसपास अवैध शराब ने तेजी बना ली। जिलेभर में शराब तस्कर सक्रिय हो गए। पुलिस ने आबकारी एक्ट में कार्रवाई कर अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने का प्रयास किया है। पुलिस ने बीते 10 दिन में दो दर्जन से ज्यादा राजस्थान आबकारी व जुआ एक्ट में कार्रवाई अंजाम दी।
इनका कहना है...
अपराध के ग्राफ के पीछे सीधी बात है लोग घरों में हैं। जब लोग एक दूसरे से नहीं मिलेंगे, घर में रहेंगे तो अपराध कम ही होगा।
-कुंवर राष्ट्रदीप, पुलिस अधीक्षक
Published on:
01 Apr 2020 07:00 am
