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17 साल पुराने घूस के मामले में सजा, एसीसीबी का पूर्व एमडी सस्पेंड, जानिए पूरा मामला

अजमेर। राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने अजमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के निदेशक बजरंग लाल झारोटिया को राज्यपाल के आदेश पर भ्रष्टाचार न्यायालय द्वारा सजा सुनाने के ढाई माह बाद निनिलंबित कर दिया है।

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Ajmer Central Co-Operative Bank

Ajmer Central Co-Operative Bank

अजमेर। राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने अजमेर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के निदेशक बजरंग लाल झारोटिया को राज्यपाल के आदेश पर भ्रष्टाचार न्यायालय द्वारा सजा सुनाने के ढाई माह बाद निनिलंबित कर दिया है। निलंबन के दौरान उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय जयपुर मुख्यालय में अपनी उपस्थिति देनी होगी।

एसीबी कोर्ट ने 22 मार्च को सुनाई थी सजा, ढाई साल बाद सरकार ने किया निलम्बित

राजस्थान सहकारी समितियां जयपुर के अतिरिक्त रजिस्ट्रार सुरेंद्र सिंह ने बुधवार को अतिरिक्त रजिस्ट्रार अजमेर खण्ड को उक्त आदेश की तामील करवाकर प्रति शीघ्र भिजवाने के निर्देश दिए हैं। विशिष्टन्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम क्रम एक के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन मित्रा ने 22 मार्च 2023 को अजमेर सेन्ट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अधिशासी अधिकारी एवं कार्यवाहक प्रबन्ध निदेशक झारोटिया को 17 साल पुराने रिश्वत के मामले में 4-4 साल की सजा सुनाई थी।

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झारोटिया पर उदयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में प्रबन्ध निदेशक रहते हुए 2006 में कम्प्यूटर का काम करने वाली फर्मों से बिल पारित करने के एवज में में 38 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप था एसीबी कोर्ट ने झारोटिया को विभिन्‍न धाराओं में 4-4 साल के साधारण कारावास और 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। झारोटिया को करीब 10 दिन जेल में रहने के बाद जमानत भी मिल गई थी।

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यह था पूरा मामला

परिवादी सावन दवे ने 20 अक्टूबर 2006 को एसीबी उदयपुर को शिकायत देकर बताया कि उसकी व उनकी पत्नी की फर्म को बैंक ने कम्प्यूटर कार्य के लिए अधिकृत कर रखा है। उसकी कम्पनी को वर्ष 2003 से उदयपुर के बापूबाजार, शास्त्री सर्कल, बड़गांव, गेगुंदा, भींडर, फतहनगर, राजसमंद जिले में नाथद्वारा, कांकरोली शाखा का कार्य दे रखा है, जबकि उसकी उसकी पत्नी की फर्म को उदयपुर में ऋषभदेव, सलूंबर, धरियावद तथा राजसमंद जिले में रेलमगरा, भीम, देवगढ़, आमेट शाखाओं में कम्प्यूटर का काम दे रखा है। आरोपी तत्कालीन एमडी बजरंगलाल झारोटिया बापू बाजार की शाखा में जनवरी 2006 से नियुक्त हुए, तब से बिल पास करने की एवज में राशि की मांग कर रहे हैं। उसकी फर्म की एवज में 8 शाखाओं के बदले 24 हजार और पत्नी के 7 शखाओं के 2 मह के 14 हजार रुपएकुल राशि 38 हजार की मांग रहे हैं।