
अजमेर। जन संगठनों ने रविवार को ब्यावर में आरटीआइ संग्रहालय के शिलान्यास समारोह में जिंदा लोगों को मृत बताकर पेंशन रोकने के मामले सार्वजनिक किए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने इस तरह के मामलों को गंभीर बताते हुए लोगों से कहा कि वे हक के लिए कोर्ट जाएं। उन्होंने संविधान और संवैधानिक हकों पर आक्रमण का मुद्दा उठाते हुए लोगों से सजग रहने का आह्वान किया, वहीं सूचना का अधिकार (आरटीआइ) को भ्रष्टाचार रोकने का सही माध्यम बताया।
ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ.एस. मुरलीधर ने आधार कार्ड नहीं होने के कारण पेंशन रोकने को असंवैधानिक बताया, वहीं आरटीआइ को जनता का अपना कानून बताया। पूर्व न्यायाधीश लोकुर व पूर्व न्यायाधीश मुरलीधर, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय और सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने रविवार को ब्यावर में आरटीआइ संग्रहालय का शिलान्यास किया। समारोह में घोषणा पत्र भी जारी किया। लोकुर ने कहा कि ब्यावर से शुरू हुई सूचना के अधिकार की अलख देश में मिसाल है। आरटीआइ संग्रहालय पीढ़ियों तक जनता के संघर्ष को प्रदर्शित करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि विश्व के सशक्त लोकतंत्र, मजबूत संविधान के बावजूद देश में जनहित के कानूनों को कुचला जा रहा है। सरकारें सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं करतीं, कहीं नियुक्ति होती है तो आयुक्त खुद को सर्वोपरी समझते हैं।
उन्होंने कहा कि आरटीआइ की धारा-4 के अंतर्गत सरकारें खुद सूचना जारी करें तो जनता परेशान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण पेंशन रोकने के बजाय वोटर कार्ड की तरह दूसरे दस्तावेज भी मान्य हों। सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने उन लोगों से मिलवाया, जिनको मृत बता पेंशन रोक दी गई।
Published on:
21 Oct 2024 11:39 am
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