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ये हैं हमारी आरएएस बेटियां, मेहनत से छुआ बुलंदियों का आसमान

केकड़ी तहसील के सावर तथा दो अजमेर शहर की निवासी है। तीनों ने अपनी सफलता का श्रेय परिजन और शिक्षकों को दिया है।

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अजमेर

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dilip sharma

Oct 19, 2017

girls doing well in RAS-2016 exam

girls doing well in RAS-2016 exam

दिलीप शर्मा/रक्तिम तिवारी/सत्यनारायण कहार/अजमेर।

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित आरएएस भर्ती-2016 में अजमेर जिले की तीन बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों में मेहनत और लगन से अपनी योग्यता साबित कर लक्ष्य हासिल किया। इनमें एक केकड़ी तहसील के सावर तथा दो अजमेर शहर की निवासी है। तीनों ने अपनी सफलता का श्रेय परिजन और शिक्षकों को दिया है।

माता ने निभाई पिता व भाई की भूमिका

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित मेघा भारद्वाज ने परिवार की विपरीत परिस्थतियों के बावजूद मुकाम हासिल किया है। रेलवे में कार्यरत मेघा के पिता का जून 2012 में आकस्मिक निधन हो गया। पिता की जगह भाई आकाश की नौकरी लगी, लेकिन 27 मार्च 2015 को विधाता ने उसे भी छीन लिया। पिता व भाई की मौत के बाद मेघना टूट सी गई थी, लेकिन ऐसे संकट में माता गायत्री शर्मा ने बेटी का हौसला टूटने नहीं दिया। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल सावर में प्राचार्य गायत्री शर्मा ने बेटी मेघना को बेटे की तरह पाला। उसे आरएएस की परीक्षा तैयारी में हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराई। मूल रूप से शाहपुरा (जयपुर)) निवासी यह परिवार बीते एक दशक से केकड़ी में निवास कर रहा है। परीक्षा परिणाम आते ही मेघा ने सबसे पहले अपने पिता व भाई की तस्वीर के पास जाकर नमन किया।

आरएएस के लिए छोड़ी इंजीनियरिंग

व्यवसायी पिता और गृहिणी माता की इंजीनियर पुत्री सागर विहार कॉलोनी निवासी शालिनी बजाज ने महिला वर्ग में 14 वां स्थान प्राप्त किया है। मार्च 2017 में गुरुग्राम में आईबीएम से एप्लीकेशन डवलपमेंट की नौकरी छोड़कर आरएएस की तैयारी प्रारंभ की। शालिनी अपनी सफलता का श्रेय खंगारोत एंड चौहान क्लासेज अजमेर के निदेशक ज्वाला प्रताप सिंह के मार्गदर्शन व अपने चाचा कमल व अरुण कुमार बजाज को देती हैं। शालिनी ने राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज से इलैक्ट्रॉनिक्स व कम्यूनिकेशन से इंजीनियरिंग पूर्ण की है।

अब आईएएस बनने का लक्ष्य
चार्टर्ड एकाउंटेंट मोनिका यादव पहले ही चरण में चयनित हुई हैं। उनकी 93 वीं रैंक है। मोनिका का लक्ष्य आईएएस बनने का है। वर्तमान में वह सीए की प्रेक्टिस कर रही हंै। मोनिका ने एम.कॉम. नेट व जेआरएफ की परीक्षा भी प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण की। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने अभिभावक व दादी को देती हैं। मोनिका के पिता हरफूलसिंह यादव धौलपुर में अतिरिक्त कलक्टर हैं।