
summer camp in colleges
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
राज्य के सरकारी कॉलेज में इस बार जून में उद्यमिता एवं कौशल विकास प्रशिक्षण चलने मुश्किल हैं। विद्यार्थियों की परीक्षाओं में व्यस्तता और कोरोना संक्रमण को देखते हुए कॉलेज शिक्षा निदेशालय को इस साल कार्यक्रम टालना पड़ेगा।
सरकार ने विभिन्न कॉलेज में उद्यमिता और कौशल विकास पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं। इन रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में कई विद्यार्थियों ने दाखिले लिए हैं। पाठ्यक्रमों को उपयोगी बनाने और विद्यार्थियों का प्रायोगिक-शैक्षिक ज्ञान बढ़ाने के लिए साल 2019 से ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई।
कॉलेज में लगाए गए थे कैंपपिछले साल जून में सभी कॉलेज में कैंप लगाए गए। इनमें 18 से 30 वर्ष के बारहवीं उत्तीर्ण, स्नातक/स्नातकोत्तर विषयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर कोर्स, सिलाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, इंग्लिश स्पीकिंग-राइटिंग और अन्य कोर्स चलाए गए। कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थी के प्लेसमेंट कराने की भी व्यवस्था की गई थी।
इस बार हालात अलग
कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते इस बार हालात अलग हैं। कई सरकारी कॉलेज में शेल्टर होम बनाए गए हैं। विश्वविद्यालयों की सालाना और सेमेस्टर परीक्षाएं बकाया हैं। इन परीक्षाओं का आयोजन जून में प्रस्तावित है। इनको देखते हुए कॉलेज में उद्यमिता और कौशल विकास प्रशिक्षण मुश्किल हैं। साथ ही अर्जुन दृष्टि कार्यक्रम के तहत खो-खो, कबड्डी, टेनिस, वॉलीबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन खेल के प्रशिक्षण कैंप लगने भी आसान नहीं हैं।
नियमों-शर्तों को बनाएं सरल, तभी चल सकेंगी इंडस्ट्री
अजमेर. लघु उद्योग भारती ने केंद्र और राज्य सरकार से उद्यम विकास के लिए नियमों-शर्तों में सरलीकरण का आग्रह किया है। अध्यक्ष अजीत अग्रवाल और सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि भारत सहित कई देश कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। केंद्र सरकार के दिशा निर्देशानुसार पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया है। इससे औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप है। मॉडिफाइड लॉकडाउन में फैक्ट्री-कारखाने में श्रमिकों को बगैर कटौती के वेतन, श्रमिकों की रहने-खाने की व्यवस्था, सोशल डिस्टेंसिंग जैसी शर्तें लगाई गई है। प्रधानमंत्री सहायता कोष और मुख्यमंत्री सहायता कोष में भी करोड़ों की राशि उद्योगों ने दी है।
Published on:
02 May 2020 09:12 am
