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HUMAN STORY : छह घंटे थमी रही पूरे गांव की सांसें

आम दिनों की तरह ही वे आज भी खेत पर सिंचाई करने गए थे, नहीं पता था कि लौटकर घर की देहरी नहीं देख पाएंगे। खेत की सिंचाई के दौरान अचानक कुआं ढह गया और मलबे में दब गई दो जिंदगानी। इन्हें मलबे से निकालने के लिए ग्रामीणों समेत रेस्क्यू दल ने करीब छह घंटे लगातार मशक्कत की। इस दौरान पूरे गांव की सांसें थमी रहीं और इनकी सलामती की दुआ करते रहे, लेकिन नियती अपना क्रूर खेल खेल चुकी थी। जब तक उन्हें कुएं से बाहर निकाला जा सका तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
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HUMAN STORY : छह घंटे थमी रही पूरे गांव की सांसें

मांगलियावास के समीप ग्राम अमृतपुरा में कुएं में गिरे दो ग्रामीणों को निकालने का प्रयास करती रेस्क्यू टीम।

मांगलियावास ( अजमेर ).

ग्राम पंचायत गोला के ग्राम अमृतपुरा में बुधवार को सिंचाई के लिए खेत पर गए दो जनों की कुआं ढहने से मौत हो गई। दोनों जने कुएं के पास ही थे कि अचानक कुआं भरभराकर ढह गया। इससे दोनों जने मलबे के साथ कुएं में गिर गए। करीब छह घंटे चले रेस्क्यू अभियान में देर शाम दोनों के शव निकाले जा सके।

ग्राम में दोपहर 1 बजे कुआं ढहने से 2 जने मलबे में दब गए। इसकी सूचना मिलने पर उपखण्ड अधिकारी समंदरसिंह भाटी समेत अन्य अधिकारी एवं पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा। जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस व एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच गईं।

जेसीबी व हाइड्रो क्रेन की मदद से कुएं से मलबा हटाने में जुट गए। करीब 6 घंटे की मशक्कत के बाद कुएं के एक तरफ से मिट्टी हटाने के बाद एसडीआरएफ टीम ने कुएं में उतरकर दोनों शवों को बाहर निकला।

पुलिस के अनुसार मसूदा क्षेत्र के ग्राम माधोगढ़ निवासी कालूराम गुर्जर (40) व अमृतपुरा-गोला निवासी लक्ष्मण गुर्जर (55) अमृतपुरा निवासी प्रह्लाद गुर्जर के कुएं पर फसल में सिंचाई करने गए थे। वे दोनों कुएं के पास ही थे कि अचानक कुआं ढह गया।

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इससे कालूराम व लक्ष्मण मलबे के साथ कुएं में जा गिरे। बाद में एसडीआरएफ टीम की मदद से शव को कुएं से निकालकर पीसांगन चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां पोस्टमार्टम कराकर परिजन के सुपुर्द कर दिए।

मलबे में दबे शव, कुएं में भरा पानी

अमृतपुरा में कुआं ढहने पर माधोगढ़ निवासी कालूराम गुर्जर व अमृतपुरा-गोला निवासी लक्ष्मण गुर्जर के मलबे में दब जाने पर कुएं में भरा पानी रेस्क्यू टीम के लिए चुनौती बन गया। ग्रामीणों की सूझबूझ से कुएं में एक अन्य मोटर उतारकर करीब 1 घंटे तक पानी बाहर निकाला गया। कुएं से पानी तोड़ने के बाद टीम के सदस्य रस्सों की मदद से कुएं में उतरे और शवों को बाहर निकाला।

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जिंदा होने की आस, बहते रहे आंसू

कुआं ढहने की सूचना मिलते ही मलबे में दबे दोनों जनों के परिजन मौके पर पहुंच गए। करीब 6 घंटे तक चले रेस्क्यू कार्य में दोनों युवकों के जिंदा होने की आस में परिजन की आंखों से आंसू बहते रहे। करीब छह घंटे बाद दोनों के शव बाहर निकाले गए तो पूरे गांव में मातम छा गया।

मंडराता रहा खतरा

रेस्क्यू टीम के दो सिपाही सुरजाराम व जितेंद्र ने पुराने कुएं के अंदर जाकर दोनों युवकों के शव बाहर निकाले। इस दौरान कुएं के चारों तरफ से ढहने की आशंका बनी रही। कुएं में जगह नहीं होने के कारण पाइपों के झूलते रस्सों के बीच आशंका रही कि कहीं कुएं के बड़े-बड़े पत्थर रेस्क्यू टीम पर ना गिर जाएं। हालांकि उनकी सूझबूझ के बाद बुधवार शाम करीब सवा 6 बजे दोनों शव बाहर निकाले जा सके।

रेस्क्यू टीम में यह थे शामिल

एसडीआरएफ टीम में हैड कांस्टेबल बग्गी मीणा, कांस्टेबल अर्जुनराम, चोलाराम, अशोक, मामराज, सुरज्ञान, सरवन, इंदरराम, हनुमान राम, पवन कुमार, सरोज राम, जितेंद्र, सुनीता आदि शामिल थे।