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MDSU: जितनी मर्जी उतनी हथियाओ जमीन, यहां किसे है परवाह

विश्वविद्यालय की जमीन पर जगह-जगह कब्जे। कई जगह हो गए अवैध निर्माण।

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

रामजी की चिडिय़ा रामजी का खेत, खाओ री चिडिय़ा भर-भर पेट…कहावत महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) पर खरी उतर रही है। सरकार से मिली 700 एकड़ से ज्यादा जमीन की विश्वविद्यालय को परवाह नहीं है। अतिक्रमियों ने कई जगह जमीन पर कब्जे (illegal capture) कर लिए हैं। अब इन्हें छुड़ाना आसान नहीं है। कब्जे वाली जमीन कई टुकड़ों में करीब 70 से 80 बीघा है।

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विश्वविद्यालय की स्थापना 1987 में हुई थी। तत्कालीन भैरोसिंह शेखावत (bhairon singh shekawat) सरकार ने 1989-90 में विश्वविद्यालय को कायड़ रोड पर 700 एकड़ भूमि आवंटित की। 1990 में तत्कालीन उप राष्ट्रपति (बाद में राष्ट्रपति) डॉ. शंकरदयाल शर्मा (dr. shankar dayal sharma) ने इसका शिलान्यास किया। अपनी जमीन को लेकर विश्वविद्यालय शुरू से ही बेफिक्र रहा। इसका फायदा उठाकर अतिक्रमियों ने जमीन पर कब्जे कर लिए।

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यह हुआ है जमीन का हाल
बीकानेर-जनाना अस्पताल जाने वाली रोड स्थित जमीन
कई निजी और सामाजिक, धार्मिक संस्थान और आम लोगों ने हथियाई जमीन
स्टाफ कॉलोनी के पीछे भूखंडों पर कब्जे
विश्वविद्यालय की चारदीवारी तोडकऱ बनाया आम रास्ता

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लोगों ने तोड़ दिए गेट
विश्वविद्यालय के सहायक अभियंता कार्यालय ने जमीन की पैमाइश भी कराई। इसके लिए सेवानिवृत्त गिरदावर, पटवारी की सेवाएं ली गई। अजमेर-पुष्कर रेलवे लाइन (ajmer-pushkar rail route) के पीछे वाले जमीन पर चारदीवारी बनाकर गेट (gate) लगवाए गए। अतिक्रमियों ने गेट तोड़ दिए। एक विवाह समारोह स्थल के निकट भी विश्वविद्यालय का करीब 1 हजार वर्ग गज जमीन है। यहां भी अतिक्रमियों की निगाहें टिकी हैं।

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विवि की जमीन पर रेल लाइन
अजमेर-पुष्कर रेलवे लाइन भी विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार वाले पहाडकऱ को काटकर निकाली गई है। तत्कालीन कुलसचिव (registrar) किशोर कुमार ने रेलवे को जमीन का मुआवजा या जमीन के बदले जमीन (land for land) देने का पत्र भी भेजा, पर मामला वहीं ठप हो गया। उनके जाने के बाद पत्रावली आगे नहीं बढ़ सकी।

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जयपुर रोड पर भी कब्जे
जयपुर रोड पर राजस्व प्रशिक्षण केंद्र के निकट विश्वविद्यालय की जमीन (land) है। यहां अवैध दुकानें और बाड़े (illegal capture) बन चुके हैं। विश्वविद्यालय ने पुलिस अथवा जिला प्रशासन से सहयोग लेकर अतिक्रमियों से जमीन खाली कराने और कार्रवाई का प्रयास नहीं किया है। हथियाई गई जमीन करोड़ों रुपए की है।