
श्रीनगर के पहाड़ी क्षेत्र में यहां बनेगा मोरसागर बांध, पत्रिका फोटो
Morasagar Dam Project Ajmer: बरसों से पेयजल संकट की मार झेल रहे अजमेर जिले के लिए मोरसागर बांध परियोजना नई 'जीवनरेखा' साबित होगी। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी एकीकृत अजमेर जल आपूर्ति योजना के तहत श्रीनगर घाटी में मोरसागर बांध का विस्तार कर बीसलपुर बांध के अतिरिक्त पानी का संचय किया जाएगा। करीब 4700 करोड़ लागत वाली यह परियोजना जिले को जल सुरक्षा देगी और पेयजल संकट से निजात मिलेगी।
जल संसाधन विभाग एवं राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन की परियोजना क्रियान्वयन इकाई ने इसके लिए सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। परियोजना पूरी होने के बाद मोरसागर बांध में लगभग 200 मिलियन क्यूबिक मीटर अर्थात 20 हजार करोड़ लीटर पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इससे अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद सहित ग्रामीण क्षेत्रों के 30 लाख से अधिक लोगों को स्थायी पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
मोरसागर परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मानसून की अनिश्चितता के बावजूद जिले को पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा। वर्तमान में 72 से 96 घंटे के अंतराल से होने वाली जलापूर्ति की समस्या में भी कमी आएगी। नई जल संरचना और पाइपलाइन व्यवस्था से पुरानी लाइनों के बार-बार फटने की समस्या का भी समाधान होगा।
परियोजना के तहत मोरसागर बांध को बीसलपुर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। बांध क्षेत्र में 5 अर्द्ध इंडेंटमेंट (मिट्टी के पाल) बनाए जाएंगे। डेम के लिए सड़क भी विकसित होगी। कैचमेंट क्षेत्र में ड्रिलिंग और भू तकनीकी सर्वे का कार्य जारी है। लक्ष्य वर्ष 2028 तक परियोजना को पूरा करने का है।
30 से 35 मीटर ऊचाई प्रस्तावित हैं बांध की
200 मिलियन क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता
लगभग 100 वर्ष तक उपयोगी जल भंडारण क्षमता
2 साल तक जिले की पेयजल आवश्यकता का भडारण
अजमेर जिले की बीसलपुर पर निर्भरता में आएगी कमी
बीसलपुर के ओवरफ्लो पानी का होगा उपयोग
चंबल नदी के राणा प्रताप सागर बांध के अतिरिक्त पानी का उपयोग
ईआरसीपी योजना के माध्यम से पानी बीसलपुर तक पहुंचेगा
बीसलपुर से टोरड़ी सागर तक 26 किमी फीडर कैनाल
टोरड़ी सागर से लांबा हरिसिंह तक पाइप लाइन एवं पम्पिंग
तिहारी बांध होते हुए पानी मोरसागर जलाशय तक पहुंचेगा
ग्रेविटी और लिफ्ट दोनों तकनीकों का होगा उपयोग
प्रभावित गांव नौलखा, टंटिया, बालदकादड़ा सहित आस-पास के क्षेत्र
बांध की ऊंचाई बढ़ने से डूब क्षेत्र का विस्तार
कृषि भूमि, मकानों और विरासत संपत्तियों पर संकट
खेत-खलिहान, आजीविका प्रभावित होने की आशंका
पुनर्वास एवं मुआवजे की स्पष्ट नीति की मांग
श्रीनगर मार्ग पर एलिवेटेड रोड बनाने की मांग
नालेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य परिसंपत्तियों के डूब क्षेत्र में आने की आशंका
रोजाना लगभग 300 एमएलडी स्थिर जलापूर्ति
अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ व नसीराबाद को लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्तर में होगा सुधार
भीषण गर्मी में जलसंकट से मिलेगी राहत
भविष्य की जल मांग पूरा करने की क्षमता
परियोजना से जहां लाखों लोगों को राहत मिलेगी, वहीं डूब क्षेत्र में आने वाले कुछ गांवों के सामने विस्थापन की चुनौती भी खड़ी हो रही है। ग्रामीण पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग को लेकर समय-समय पर विरोध भी दर्ज करा चुके हैं।
राज्य सरकार बांध से प्रभावित पुनर्वास नीति के - तहत उचित मुआवजा व वैकल्पिक आवास की घोषणा कर राहत प्रदान करे। बांध का ड्राइंग नक्शा सार्वजनिक करें।
उज्ज्वल यादव, अध्यक्ष, ग्रामीण संघर्ष समिति श्रीनगर
मोरसागर बांध बनने से की पेयजल से जिले
समस्या का समाधान होगा। निकटवर्ती गांव के कुओं का जलस्तर बढ़ने से किसानों का जीवन स्तर ऊंचा होगा।
सत्यनारायण जांगिड़, तहसील T अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ श्रीनगर
Updated on:
08 Jun 2026 08:41 am
Published on:
08 Jun 2026 08:29 am
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