
common admission test
अजमेर.
देश के विश्वविद्यालयों में एन्ट्रेंस टेस्ट योजना की शुरुआत को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। यूजीसी के नियमों पर विश्वविद्यालयों की निगाहें टिकी हैं। लोकसभा चुनाव के बाद ही कोई फैसले की उम्मीद है।
मौजूदा समय केंद्रीय विश्वविद्यालयों और विभिन्न प्रदेशों में निजी/सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा होती। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को कला, वाणिज्य, विज्ञान, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और अन्य कोर्स में दाखिले मिलते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय सभी विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा लागू करना चाहता है। यूजीसी को इसके नियम बनाने को कहा गया है। लेकिन एक साल से यूजीसी ने कोई खुलासा नहीं किया है।
होने हैं लोकसभा चुनाव
देश में जल्द लोकसभा चुनाव होंगे। ऐसे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी एन्ट्रेंस टेस्ट योजना पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा यूजीसी के नियमों का सभी विश्वविद्यालयों को इंतजार है। इसके बाद ही विश्वविद्यालय अपनी सिंडिकेट अथवा प्रबंध मंडल में इन नियमों पर चर्चा करेंगे। यह माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद ही योजना पर कोई फैसला होने की उम्मीद है।
...तो मदस विश्वविद्यालय भी शामिल
देश के सभी विश्वविद्यालयों में एन्ट्रेंस टेस्ट योजना लागू हुई तो उसमें महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय शामिल हो सकता है। यहां मैनेजमेंट, कॉमर्स, जूलॉजी-बॉटनी, पर्यावरण अध्ययन, फूड एन्ड न्यूट्रिशियन, रिमोट सेंसिंग, कम्प्यूटर, इतिहास, राजनीति विज्ञान, इकोनॉमिक्स, हिंदी, पत्रकारिता और अन्य कोर्स संचालित हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद पिछले 31 साल में विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 1100 से 1400 तक ही सिमटी हुई है। जबकि कई राज्यों में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में 10 से 30 हजार तक विद्यार्थी पढ़ते हैं।
पहले होता था एन्ट्रेंस टेस्ट
एमडीएस विश्वविद्यालय ने पिछले 20 साल में दो-तीन बार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एन्ट्रेंस टेस्ट कराए थे। जिन विभागों में विद्यार्थियों के आवेदन पर्याप्त मात्रा में मिले वहां टेस्ट कराया गया। लेकिन कई विभागों में गिनती लायक आवेदन भी नहीं मिल सके। ऐसे में एन्ट्रेंस टेस्ट योजना को बंद करना पड़ा था।
Published on:
07 Feb 2019 07:19 am
