
Patrika Bird Fair : पत्रिका बर्ड फेयर शुरू हुआ और अजमेर पहुंच गए 250 पेलिकन
अजमेर.
हां, मेला तो इनका ही था तो भागीदारी भी बढऩी ही थी। और हुआ भी बिल्कुल ऐसा ही। अजमेर में शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से चौथा अंतरराष्ट्रीय बर्ड फेयर शुरू हुआ और दूसरे ही दिन पेलिकंस की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी देखी गई।
अजमेर में परदेसी पावणो का आगमन कोई नई बात नहीं। अपने अनुकूल आबोहवा की तलाश में ये बरसों से यहां शीतकालीन प्रवास करते रहे हैं। लेकिन इस बार अजमेर आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में जनवरी माह तक कमी देखी गई।
हजारों की संख्या में पहुंचने वाले परिंदों की संख्या सैकड़ों तक ही पहुंची। इनमें पेलिकन की भागीदारी 50-60 के आस-पास रही। ऐसे में पत्रिका की ओर से चौथे बर्ड फेयर का आयोजन शुरू हुआ। अब इसे संयोग कहा जा सकता है कि इधर मेला शुरू हुआ और अगले ही दिन आनासागर झील में बड़ी संख्या में पेलिकन के झुंड नजर आए।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और पक्षीविदें ने इनकी संख्या 300 से अधिक आंकी है। बर्ड फेयर में एक संयोग और देखने को मिला। शुक्रवार को जब आनासागर बारादरी पर उद्घाटन समारोह की रस्म अदायगी चल रही थी कि पेलिकंस का एक बड़ा जत्था विक्ट्री के आकार में परवाज भरता हुआ ठीक मंच के ऊपर से गुजरा। इन संयोग के बाद शनिवार को पक्षी प्रेमियों में भी इस बात की चर्चा रही कि अजमेर में इधर मेले की शुरूआत हुई और उधर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने विदेशी मेहमान आ पहुंचे।
वहीं मदस विवि के डॉ. विवेक शर्मा के अनुसार आनासागर में जहां 300 से अधिक पेलिकंस समेत अन्य बड्र्स ने डेरा डाला है, वहीं बड़ी संख्या में पक्षी अजमेर जिले की दूसरे झील तालाबों में भी पहुंचे हैं। इस बार अच्छी बारिश के चलते सभी जगह झील-तालाब लबालब हैं। ऐसे में मेहमान परिंदे भी बिखर-छितर गए हैं। उनके लिए पर्याप्त नम भूमि तैयार हो जाने से जहां जगह मिली उन्होंने वहीं डेरा जमा लिया है।
पत्रिका ने जगाया पक्षियों के प्रति प्रेम
गौरव पथ स्थित चौपाटी पर शनिवार को आयोजित संगोष्ठी व टॉक शो में शहर के प्रबुद्धजन, पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों ने पक्षी संसार से जुड़े विचार साक्षा किए एवं पर्यावरण संतुलन के लिए इनके संरक्षण और संवद्र्धन पर जोर दिया।
भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष एवं पूर्व एडीए चेयरमैन शिवशंकर हेड़ा ने कहा कि पत्रिका ने बर्ड फेयर के जरिए लोगों में पक्षियों के लिए प्रेम जगाया है। पत्रिका का यह अभियान परिन्दों से परिंडों तक जा पहुंचा है। लोग गौरेया समेत अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए घर के बाहर परिन्डे लगाने लगे हैं। पशु, पक्षियों और इंसान का एक परिवार है, जिसमें व्यक्ति अहम कड़ी है।
इसलिए जीवों की सुरक्षा और संवद्र्धन के लिए काम करें। पक्षीविद् डॉ. के. के. शर्मा ने कहा कि अजमेर को प्रकृति ने बहुत खूबसूरती से नवाजा है। इसी कारण हजारों मील से विदेशी परिन्दे भी प्रवास करने पहुंचते हैं।
बर्ड कंजर्वेशन सोसायटी अध्यक्ष महेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि पक्षियों के साथ समय बिताने से आंतरिक खुशी मिलती है। ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। पत्रिका बर्ड फेयर से लोगों में पक्षियों के लिए प्रेम जागा है।
ग्रीन आर्मी सचिव कुलदीप सिंह गहलोत ने कहा कि झील में मोटरबोट संचालन सीमित क्षेत्र में होना चाहिए। आटे की गोलियां और नमकीन डालने वालों पर भी सख्ती से पाबंदी लगाए जाने की जरूरत है।
मदस विवि की आकांशा वर्मा ने कहा कि पक्षियों की कई प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं। ऐसे में हमारे आस-पास जो पक्षी मौजूद हैं उनका महत्व जानें और संरक्षण के लिए प्रयास करें।
रौनक चौधरी ने कहा कि गत वर्षों में पत्रिका बर्ड फेयर के बाद मदस विवि में भी डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है। यहां के शोद्यार्थियों ने गत दो वर्ष में 80 प्रजाति आइडेंटीफाई की हैं।
विशेष बच्चों ने जानी, पक्षियों की जिंदगानी
पत्रिका बर्ड फेयर के दूसरे दिन एसटीपी के पास बने पाथ-वे पर मूक-बधिर विद्यालय तथा शुभदा स्कूल के विशेष बच्चों ने भी बर्ड वॉचिंग की। शुभदा स्कूल के विशेष बच्चे ऋषभ गुप्ता, राहुल साहू, बलबीर, सौरभ बाकोलिया, अरकम, कृष्णा त्यागी ने कहा कि उन्होंने जलीय पक्षियों को पहले कभी इतना नजदीक से नहीं देखा है।
इस दौरान हितेश झांकल, मीनू माथुर, मंशा लालवानी, अनिता मैसी, आयुषी मेहरा, विरेन्द्र यादव, लॉयंस क्लब अजमेर पृथ्वीराज के सचिव गजेन्द्र पंचोली, प्रांतीय सभापति राजेन्द्र गांधी, आभा गांधी आदि मौजूद रहे।
Published on:
19 Jan 2020 02:36 am
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