
ras mains exam policy
अजमेर.
आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती की मुख्य परीक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आरएएस मुख्य परीक्षा के लिए आरक्षित अभ्यर्थियों को बुलाने के नियम में बदलाव किया गया है। अब रिक्तियों की कुल अनुमानित संख्या के 15 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में बुलाया जाएगा। इससे न्यायिक अड़चनों को रोका जा सकेगा।
सरकार ने आदेश में कहा है कि दो स्तरों पर प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा आयोजित की जाएगी। मुख्य परीक्षा में प्रवेश के लिए अर्हित घोषित किए जाने वाले अभ्यर्थियों द्वारा प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त अंकों की उनका अंतिम योग्यता क्रम निर्धारित करने के लिए संगणना नहीं की जाएगी।
न्यूनतम अंक प्राप्त करने जरूरी
मुख्य परीक्षा में उपस्थित होने वाले अभ्यर्थियों को व्यक्तित्व और मौखिक परीक्षा में उपस्थित होने के लिए प्रत्येक पेपर में न्यूनतम 10 प्रतिशत अंक और समस्त प्रश्न पत्रों के कुल अंकों में से कुल 15 प्रतिशत अंक प्राप्त करने जरूरी होंगे। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संवर्गों से संबंधित अभ्यर्थियों को ऐसे न्यूनतम अंकों में से 5 प्रतिशत का शिथलीकरण दिया जाएगा। उन अभ्यर्थियों को जो आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा में उपस्थित होने के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक प्राप्त करते हैं उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
हर परीक्षा में रही दिक्कतें...
राजस्थान प्रशासनिक एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती-2013, 2016 में प्री. परीक्षा स्तर पर 15 गुणा से अधिक सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा से बाहर रखने पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। अदालत ने आदेश में कहा कि चयन प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता है। खंडपीठ ने आदेश दिया कि आरएएस भर्ती नियमों के तहत 15 गुणा अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा के लिए बुलाए जाएं। प्रारंभिक परीक्षा के लिए परिणाम के स्तर पर 15 गुणा से अधिक सफल घोषित अभ्यर्थियों की अलग सूची बनाई जाए। इनमें से चयन के लिए सफल होने वालों को नियुक्ति नहीं दी जाए। इस मामले में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका भी दायर की।
Updated on:
10 Jun 2020 12:00 am
Published on:
10 Jun 2020 12:00 am
