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बड़ा अजीब है यह सरकारी ऑफिस, एवरेस्ट की चोटी भी छोटी है इसके सामने

जिला मुख्यालय पर स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचकर नि:शक्तजन आईडी कार्ड बनवा रहे हैं।
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physically challenge

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अजमेर

साहब! जो पैरों से ठीक से चल नहीं पाते उन्हें दफ्तर की सीढिय़ां चढ़वा रहे हो। नि:शक्तजन (विशेष योग्यजन) के लिए सरकार गंभीर है मगर अधिकारी, कार्मिक नहीं। नि:शक्तजन के लिए प्रमाण पत्र एवं कम्प्यूटराइज्ड आईडी के लिए दफ्तर की 15 से अधिक सीढिय़ां चढऩे में नि:शक्तजन का दम फूल रहा है। कोई तो सुनें हमारी पुकार ताकि नि:शक्तजन को राहत मिल सके।

यह पीड़ा एवं दर्द उन नि:शक्तजन का है जो जिले के सुदूर गांवों से जिला मुख्यालय पर स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचकर नि:शक्तजन आईडी कार्ड बनवा रहे हैं। सोमवार को राजस्थान पत्रिका क्रे पड़ताल की तो कई नि:शक्तजन फफक पड़े।

उन्होंने संबंधित कार्मिक के करीब एक घंटे से अधिक कुर्सी पर मौजूद नहीं होने के साथ बेवजह देरी का तो आरोप लगाया ही वहीं भूतल स्थित कक्ष में नि:शक्तजन के लिए व्यवस्था नहीं करने से नाराजगी जताई। वहीं संबंधित कार्मिक के सामने सीट पर बैठे नि:शक्तजन व महिला परिजन ने बताया कि करीब आधे घंटे से अधिक समय से बैठे हैं न तो महिला कार्मिक है न कोई काम करने वाला।

केस : 1

सीएमएचओ ऑफिस में नि:शक्तजन के लिए प्रमाण पत्र व आईडी लेने के लिए सीढिय़ां चढऩी पड़ती है। प्रथम मंजिल पर एक कर्मचारी को बैठा रखा है, उसे नीचे एक अलग कक्ष खोलकर बैठाना चाहिए। जो चल फिर नहीं सकते उनको 15 से 20 सीढिय़ां ऊपर चढ़वा कर अन्याय कर रहे हैं।

-कन्हैयालाल, नि:शक्तजन निवासी देवगांव (केकड़ी)

केस : 2
सीढिय़ां चढ़कर दम भर गया है। हांफू-हांफू हो गया हूं। दूर गांव से बड़ी मुश्किल से यहां पहुंचा हूं। नीचे बताया कि नि:शक्तजन का काम ऊपर हॉल में हो रहा है। यहां भी कई देर से इंतजार कर रहे हैं लेकिन न तो कर्मचारी है न कोई सुनने वाला।

-लालाराम, नि:शक्तजन

केस : 3

करीब डेढ़ घंटे से इधर-उधर घुमा रहे हैं। काम करने वाली मैडम है ही नहीं। कोई कहता है ऊपर जाओ, फिर कोई कहता है नीचे जाओ, परेशान हो गया हूं। विकलांग लोगों के लिए सरकार कहती है कि भू-तल पर ही दफ्तर होना चाहिए, फिर यहां व्यवस्था क्यों नहीं की गई है?

-भागचंद, नि:शक्तजन