रक्तिम तिवारी/अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) दोनों इंजीनियङ्क्षरग कॉलेज (engineering college) को ‘खुद’ से जोडऩे की कवायद में जुटेगा। दोनों संस्थाओं को संघठक कॉलेज बनाने का प्रस्ताव तकनीकी शिक्षा विभाग भेजा जाएगा। इससे विश्वविद्यालय को कई फायदे होंगे।
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बड़लिया और माखपुरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर (bikaner) और कोटा (kota) के तकनीकी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं। विद्यार्थियों की सेमेस्टर और प्रयोगिक परीक्षाएं, पेपर (paper) और पाठ्यक्रम निर्माण (syallbus) दोनों विश्वविद्यालय करते हैं। सेमेस्टर परीक्षाएं (semester exam), परिणाम निकालने और प्रवेश (admission) कार्यों में प्रतिवर्ष विलम्ब हो रहा है। दोनों कॉलेज स्वायत्तशासी समितियों (autonomous society) के अधीन संचालित हैं। सरकार से अनुदान नहीं मिलता है। साथ ही अनियमितताओं से सरकार की किरकिरी हो रही है।
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दो साल पहले बना था प्रस्ताव
वर्ष 2017 में तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी (kailash sodani) ने सीएमओ और तकनीकी शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इसमें दोनों कॉलेज को आरटीयू (RTU) के बजाय विभिन्न महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का संघठक कॉलेज बनाना प्रस्तावित था। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (vasundhra raje) और पूर्व राज्यपाल कल्याणसिंह (kalyan singh) ने इसकी सैद्धांतिक सहमति दी। लेकिन दोनों कॉलेज के तत्कालीनअधिकारियों को स्वायतत्ता खोना पसंद नहीं आया।
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विवि दोबारा भेजेगा प्रस्ताव
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय नए सिरे इंजीनियरिंग कॉलेज बड़लिया और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज माखुपुरा को संघठक कॉलेज (constituent college) बनाने का प्रस्ताव भेजेगा। वित्तीय, प्रशासिनक पहलुओं पर भी चर्चा होगी। मालूम हो कि इंजीनियरिंग कॉलेज में मनमानी नियुक्तियों (posting), पदोन्नतियों (promtion), पसंदीदा किराए का मकान लेने, बगैर अनुमति विदेश यात्राओं जैसी शिकायतें मिलती रही हैं।
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यह होंगे विश्वविद्यालय को फायदे
-विश्वविद्यालय को मिलेगी कई इंजीनियरिंग फेकल्टी
-आईटी,कंप्यूटर और सिविल क्षेत्र में मिलेगी मदद
-बढ़ेगी शिक्षकों और विद्यार्थियों की बढ़ेगी संख्या
-सह शैक्षिक, तकनीकी और शैक्षिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
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फैक्ट फाइल
1996-97 में स्थापित हुआ इंजीनियरिंग कॉलेज बड़लिया
2007-08 में स्थापित हुआ महिला इंजीनियरिंग कॉलेज
25 से ज्यादा कोर्स संचालित हैं दोनों कॉलेज में
125 से ज्यादा शिक्षक हैं कार्यरत
2 हजार से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत
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दोनों इंजीनियरिंग कॉलेज को संघठक कॉलेज बनाया जाना है। हम इसके लिए बिल्कुल तैयार हैं। सरकार और तकनीकी शिक्षा विभाग को जल्द प्रस्ताव भेजेंगे।
प्रो. आर. पी. सिंह, कुलपति मदस विश्वविद्यालय