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राजस्थान में एक अनोखा बैंक, जहां जमा होती है रामनाम की पूंजी

जिन्दगी में अपनी कमाई पूंजी के लिए बैंकों में खाते खुलवाते तो आप ने गांव-शहर में सभी जगह देखे होंगे, मगर रामनाम का अनूठा बैंक नहीं देखा होगा।

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अजमेर

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Nupur Sharma

Jan 07, 2024

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चन्द्र प्रकाश जोशी
जिन्दगी में अपनी कमाई पूंजी के लिए बैंकों में खाते खुलवाते तो आप ने गांव-शहर में सभी जगह देखे होंगे, मगर रामनाम का अनूठा बैंक नहीं देखा होगा। ऐसा ही एक बैंक अजमेर में है। रामनाम के इस बैंक की देशभर में कई जगह शाखाएं हैं। लाखों खाताधारक हैं, मगर बैंक की शाखा खोलने का जिम्मा उन्हीं को दिया जाता है जिसने विशेष पूंजी रामनाम बैंक में जमा करवाई हो।

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अजमेर में करीब 36 साल पूर्व इस बैंक की स्थापना हुई। पुलिस लाइन स्थित मंदिर में बैंक की मुख्य शाखा का संचालन हो रहा है। बैंक के संस्थापक सदस्य बालकृष्ण पुरोहित के अनुसार अब तक सौ अरब रामनाम मंत्र का संग्रह हो चुका है। भविष्य में इन रामनाम मंत्रों का पुष्कर में भव्य मंदिर बनाने की योजना है।


रामनाम बैंक की ऐसे हुई शुरुआत
7 अप्रेल 1987 को पहली बार रामनाम लिखने का काम शुरू हुआ। एक कॉपीनुमा खाते में 25 हजार राम नाम लिखने पड़ते हैं। फिर इन रामनाम मंत्रों का संग्रह होता है। 84 लाख रामनाम लिखने वाले सदस्यों को इसके संचालन का जिम्मा मिलता है। इसमें बुजुर्ग, महिला पुरुष, युवा, बच्चे घरों-दुकानों, कार्यालयों में बैठकर रामनाम लिखते रहते हैं। इस तरह के रामनाम मंत्रों के करीब 18 ट्रक भरने जितना संग्रह रखा है। जयपुर में 8 ट्रक, पुष्कर में 6 ट्रक एवं अजमेर में 6 ट्रक भरने जितनी पूंजी (रामनाम लिखी कॉपियां) रखी हैं। बैंक में करीब 40 लाख़ रामनाम लिखी पुस्तकें संग्रहीत हैं।

देश में यहां शाखाएं
अयोध्या, इलाहाबाद, लखनऊ, अहमदाबाद, सूरत, मुम्बई, चैन्नई, तमिलनाड़ू, कर्नाटक, इंदौर, उज्जैन, दिल्ली, जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा सहित अन्य जगह रामनाम बैंक की शाखाएं हैं। वहां इनका लेखा-जोखा मेंटेंन होता है।

70 लाख की लागत से बन रहा मंदिर
राज्य सरकार की ओर से 1992 में बूढ़ा पुष्कर में एक बीघा जमीन आवंटित हुई। यहां करीब 70 लाख की लागत से भवन का निर्माण हो रहा है। मंदिर के लिए 11 बीघा भूमि की डिमांड है। बाद में सभी रामनाम मंत्रों का यहां वृहद मंदिर बनाया जाएगा।

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नडि़याद में देखा स्वप्न, हुआ साकार
पुरोहित बताते हैं कि 1984 में वे नडि़याद में संतरामजी के मंदिर पहुंचे। स्वप्न आया कि वे राम नाम लिख रहे हैं। यही स्वप्न 1987 में नवाह्न पारायण पाठ के दौरान अजमेर पुलिस लाइन मंदिर में देखा तो उन्होंने उसी दिन से राम नाम लिखने का संकल्प लेकर काम शुरू कर दिया। फिर लोग जुड़ते गए।

रामनाम मंत्रों की परिक्रमा से मिलता है मोक्ष
पुरोहित ने संस्मरण में बताया कि रामसुखदास महाराज को जब रामनाम बैंक लिखवाकर मंत्रों की व्यवस्था के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि रामनाम मंत्रों की परिक्रमा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। रामायण वटवृक्ष है तो बीज रामनाम मंत्र है। इसलिए पुष्कर में रामनाम मंत्र का मंदिर बनाएंगे, ताकि श्रद्धालु, आमजन परिक्रमा कर सकें।