
history on ancient world
अजमेर.
यूरोपीय राष्ट्रों में भी सनातन धर्म विद्यमान है। कई राष्ट्रों में भारतीय पौराणिक देवी-देवताओं की पूजा अर्चना होती है। करते हैं। इसके अलावा वंशावलियों से इतिहास की वास्तविकता प्रकट होती है। यह विचार महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में हुई एक संगोष्ठी में सामने आए हैं।
वंशावली लेखन से गौरव की अनुभूति
मेजर एस. एन. माथुर के मुताबिक एशिया की संस्कृति में समानता का भाव व्याप्त है। यूरोपीय राष्ट्रों में भी सनातन धर्म की विद्यमान है। लिथुआनिया के लोग स्वयं को राजपूत मानते हैं। कई देशों में पौराणिक देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करते हैं। वंशावली लेखकों को भारत में जहां भाट व चारण कहा जाता है वहीं हंगरी में इनको बाड़ कहा जाता है। माथुर ने हंगरी के खान-पान, रहन-सहन व वहां के सैन्य व्यवस्थाओं के बारे में भी बताया। वंशावली लेखन से जो गौरव की अनुभूति होती है वह इन्टरनेट या किसी अन्य तकनीकी जानकारी से नहीं हो सकती।
हंगरी के लोगों की जड़ें भारत से जुड़ी
हंगरी के कोवाच इमरे बरना ने अपनी पॉवर पॉईन्ट के माध्यम से हूण चौहानों के बारे में जानकारी दी। उनकी मानें तो औषधि निर्माण, भोजन निर्माण, की प्रक्रिया भारत से समानता रखती है। स्तूप, औजार, सिक्कों, मूर्तियों के आधार पर हंगरी के लोगों की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। उनके स्वंय के पूर्वज बिहार के निवासी थे। इसी नाम से एक शहर हंगरी में भी है। इतिहास का वास्तविक रूप आमजन के सामने आना चाहिए। जिसका जैसा व्यक्तित्व था वैसा ही व्यक्तित्व भावी पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
Published on:
13 Jan 2019 04:16 pm
