5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ग्रामीणों के रोष के बाद हटाए अवरोध

पीसांगन के बुधवाड़ा स्थित हरिपुरा में सोमवार दोपहर को हुई भारी बरसात के बाद रात्रि को हालातो का जायजा लेने मौके पर पहुंचे तहसीलदार किसनाराम चौधरी व सरपंच पीरू सिंह राठौड़ को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। मंगलवार सुबह नतीजा यह रहा कि मौके पर जेसीबी मशीन लेकर पहुंचे प्रशासन ने पानी के बंद रास्तों को खुलवाते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
less than 1 minute read
Google source verification
Remove the obstruction after rage of villagers

ग्रामीणों के रोष के बाद हटाए अवरोध

ग्रामीणों ने लगाया लीपा पोती का आरोप

बुधवाड़ा गांव का मामला

पीसांगन (अजमेर).
हरिपुरा में पीसांगन-अजमेर सड़क पर पसरी गंदगी व जलभराव की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने समस्या के स्थाई समाधान की मांग करते हुए कई बार जिम्मेदारों को ज्ञापन सौंपते हुए रास्ता जाम कर आंदोलन किया था। लेकिन हर बार जिम्मेदारों ने ग्रामीणों को आश्वासन ही दिया। एक दिन पूर्व हुई भारी बरसात से जलभराव की स्थिति पैदा हो गई और लोगों के घरों में पानी घुस गया।

सूचना पर तहसीलदार किसनाराम चौधरी व सरपंच पीरू सिंह राठौड़ हालातों का जायजा लेने पहुंचे। तब आक्रोशित ग्रामीणों ने तहसीलदार चौधरी व सरपंच राठौड़ को आड़े हाथों लेते हुए खरी खोटी सुनाई व इनका विरोध करने लगे।

हाल ही में पदस्थापित होने के कारण वस्तुस्थिति से अंजाम तहसीलदार चौधरी ने मामले की गंभीरता के मद्देनजर तत्काल अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। साथ ही समस्या का स्थाई समाधान करने की नियत से मंगलवार पुलिस जाप्ते के साथ जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचे और पानी के बंद रास्तों को खुलवाना शुरू किया।

कार्रवाई के दौरान तहसीलदार चौधरी, सरपंच राठौड़, ग्राम विकास अधिकारी मोहन सिंह राजावत, हल्का पटवारी गोपाल वैष्णव समेत ग्रामीण मौजूद रहे। वही ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को लीपापोती करार देते हुए कहा कि प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर बेवा छोटी के घर की दीवार तोड़कर पानी की राह उसके घर की ओर मोड दी व एजाज के बाड़े की दीवार में जेसीबी से छोटा छेद कर पानी निकालने का जतन मात्र किया है, जबकि प्रशासन को मौके पर मौजूद बरसाती नाले के सभी अवरोध हटवाकर नाले को खुलवाना चाहिए था, ताकि भविष्य में जल प्लावन की स्थिति पैदा नही हो।