
rpsc runs without chairman
अजमेर. राजस्थान लोक सेवा आयोग सोमवार को बगैर अध्यक्ष चला। एक्ट के अनुसार सामान्य कामकाज हुए। सरकार और राजभवन ने स्थाई अथवा कार्यवाहक अध्यक्ष को लेकर कोई फैसला नहीं किया। पांच साल में चौथी बार आयोग में ऐसे हालात बने हैं।
वर्ष 1949 में राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा का गठन किया गया था। आयोग में स्थाई अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने पर या तो सरकार के निर्देश पर राज्यपाल नए अध्यक्ष की नियुक्ति अथवा वरिष्ठ सदस्य को कार्यभार सौंपते हैं। संवैधानिक संस्थान होने से साल 2014 में कार्यवाहक अध्यक्ष बने डॉ. आर. डी. सैनी तक यह परम्परा बदस्तूर चली।
स्थाई अथवा कार्यवाहक अध्यक्ष का इंतजार
स्थाई या कार्यवाहक अध्यक्ष नहीं होने पर सोमवार को एक्ट के अनुसार नियमित कार्य हुए। आयोग को 25-26 फरवरी को आरएएस मुख्य परीक्षा-2021 करानी है। लिहाजा सरकार द्वारा अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं करने पर फुल कमीशन की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें सर्वसम्मति से वरिष्ठतम या अन्य किसी सदस्य को व्यवस्थाएं बनाए रखने और साक्षात्कार बोर्ड तय करने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
पंवार ने शुरू की पद त्याग परम्परा
वर्ष 2015 में अध्यक्ष बने डॉ. ललित के पंवार का कार्यकाल 10 जुलाई 2017 को खत्म हुआ। तत्कालीन भाजपा सरकार के स्तर पर यहीं से कायदे-परम्पराएं बदली गई। पंवार पद त्याग (रिलेंक्विश) कर चले गए। हालांकि तत्कालीन सदस्य श्याम सुंदर शर्मा को उसी दिन अध्यक्ष बना दिया। शर्मा 28 सितम्बर 2017 को कार्यकाल खत्म होने पर पद त्याग कर चले गए। शर्मा के बाद 80 दिन तक अध्यक्ष पद रिक्त रहा। डॉ. आर.एस. गर्ग 17 दिसंबर को अध्यक्ष बने लेकिन 1 मई 2018 को वे भी पद त्याग कर चले गए। सरकार ने 80 दिन बाद दीपक उप्रेती को स्थाई अध्यक्ष बनाया। बीती 29 जनवरी को डॉ. शिवसिंह राठौड़ छह वर्षीय कार्यकाल पूरा कर पद त्याग कर चले गए।
यूं बनता है पूरा आयोग
राजस्थान लोक सेवा आयोग में 1 अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं। इसे फुल कमीशन कहा जाता है। आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं के परिणाम, भर्तियों से जुड़े नियम, किसी परीक्षा या साक्षात्कार को स्थगित करने के फैसले फुल कमीशन की बैठक में होते हैं।
Published on:
01 Feb 2022 08:00 am
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