
law colleges problem
अजमेर.
तीन साल की सम्बद्धता और स्थाई मान्यता के लिए लॉ कॉलेज तरस गया है। बीसीआई, सरकार और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय एकदूसरे को पत्र भेजने में व्यस्त हैं। कॉलेज की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
बीसीआई ने सभी विश्वविद्यालयों को लगातार तीन साल की सम्बद्धता देने को कहा है। इसको लेकर लॉ कॉलेज ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय और सरकार को कई पत्र भेजे पर कोई जवाब नहीं मिला है। कॉलेज विश्वविद्यालय को सत्र 2018-19, 2019-20 और 2021-22 का एकमुश्त सम्बद्धता शुल्क जमा करा चुका है। फिर भी स्थिति यथावत है।
यूं करता है विश्वविद्यालय निरीक्षण
मौजूदा व्यवस्था के तहत महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष लॉ कॉलेज से सम्बद्धता फीस वसूलता हैं। इसके बाद वह टीम भेजकर कॉलेज का निरीक्षण कराता है। निरीक्षण रिपोर्ट में शिक्षक, संसाधन, पुस्तकालय, कम्प्यूटर, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं का ब्यौरा होता है। इसके आधार पर कॉलेज को पाठ्यक्रम संचालन और दाखिलों के लिए एक साल की अस्थाई सम्बद्धता देता हैं।
सिर्फ फाइल में घूम रहा प्रस्ताव
तीन साल की सम्बद्धता के लिए लॉ कॉलेज, सरकार और विश्वविद्यालय के बीच सिर्फ फाइल घूम रही है। एकमुश्त सम्बद्धता के लिए विश्वविद्यालय को एक्ट में संशोधन करना जरूरी है। इसके लिए सरकार और विधानसभा ही अधिकृत है। बीसीआई के प्रस्ताव और लॉ कॉलेज के पत्र पर ना सरकार ना विश्वविद्यालय के बीच कोई बातचीत हुई है।
फिर होगी दाखिलों में देरी?
पिछले तीन सत्रों से लॉ कॉलेज के प्रथम वर्ष के प्रवेश में देरी हो रही है। विश्वविद्यालय, बीसीआई और कॉलेज शिक्षा निदेशालय के बीच कोई तालमेल नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को नवंबर-दिसंबर से पहले दाखिले नहीं मिलते हैं। इस साल भी कोई फैसला नहीं हुआ तो लगातार 15 वीं मर्तब कॉलेज के प्रवेश देरी से होंगे।
Published on:
04 Feb 2019 07:20 am
