
जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है इस यूनिवर्सिटी में, सबकी निगाहें टिकी हैं गवर्नर पर
अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर अब तक सस्पेंस बना हुआ है। यहां राजस्थान हाईकोर्ट की रोक के बाद कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह फिलहाल कामकाज नहीं कर सकते हैं। प्रशासन की निगाहें कुलाधिपति एवं राज्यपाल कल्याण सिंह पर टिकी हैं। फिलहाल राजभवन से कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
लक्ष्मीनारायण बैरवा की जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग और जस्टिस दिनेश मेहता की खंडपीठ ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह को नोटिस जारी कर 26 अक्टूबर तक कामकाज पर रोक लगा दी है। इससे विश्वविद्यालय में संकट खड़ा हो गया है। कुलपति पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
राजभवन को फैसले का इंतजार
राजभवन के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. लोकेश शर्मा ने बताया कि मामला हाईकोर्ट बनाम सरकार का है। राजभवन को हाईकोर्ट का फैसला नहीं मिला है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल कल्याण सिंह और सरकार इस मामले में परामर्श करेंगे। इसके बाद ही कुछ अधिकृत स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यह था हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने कहा है कि यूजीसी के नियमानुसार उच्च शैक्षिक योग्यता, चरित्रवान, संस्थागत प्रतिबद्धता और ख्यातनाम शिक्षाविद को कुलपति नियुक्त किया जाता है। प्रो. आर. पी. सिंह के खिलाफ चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में कुलपति रहते हुए भी कार्रवाई हुई थी। इसके बावजूद इनको कुलपति नियुक्त करना हैरान करने वाला फैसला है।
कुलपति पद पर हैं या नहीं?
विधानसभा में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2017 पारित हो चुका है। अधिनियम की धारा 9 (10) के तहत किसी विश्वविद्यालय के कुलपति पद की कोई स्थाई रिक्ति, मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने, निबंलन के कारण या अन्यथा हो जाए तो उप धारा 9 के अधीन संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव तत्काल कुलाधिपति-राज्यपाल को सूचना भेजेंगे।
कुलाधिपति सरकार से परामर्श कर किसी दूसरे विश्वविद्यालय के स्थाई कुलपति को अतिरिक्त दायित्व सौंपेंगे। इस मामले में हाईकोर्ट ने सिर्फ कुलपति प्रो. सिंह के कामकाज पर रोक लगाई है। वे पद पर हैं या नहीं इसको लेकर विश्वविद्यालय और उच्चाधिकारी नियम, एक्ट खंगालने में जुटे रहे।
Published on:
18 Oct 2018 08:15 am
