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कलक्टर ने लिया ये एक्शन तो नाराज हुए मेयर, जानें आखिर क्या है पूरा मामला…

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collector and mayor issue

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अजमेर.

नगर निगम के 13 व्यावसायिक नक्शे पास करने का विवाद अब थमने की बजाय बढ़ता जा रहा है। जिला कलक्टर द्वारा इसकी जांच के लिए गठित की गई कमेटी पर अब महापौर ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि कलक्टर को जांच का अधिकार नहीं वे कैसे व किस आधार पर नक्शों से जुड़ी पत्रावली मंगवा सकते हैं।

महापौर के अनुसार कलक्टर ने 25 से 29 सितम्बर 2018 तक सामाचार पत्र में प्रकाशित खबरों के आधार पर 13 पत्रावलियां जांच के लिए तलब की हैं, जबकि वर्तमान जिला कलक्टर इस अवधि में जिले में पदस्थापित ही नहीं थे। राजस्थान सरकार द्वारा नगर पालिका अधिनियम की धारा 327 के तहत पत्रावलियों पर निर्णय करते हुए मामले को नगर निगम की साधारण सभा में पास कराया जा चुका है। ऐसी स्थिति में जिला कलक्टर को साधारण सभा द्वारा लिए गए निर्णय के अपीलीय अथवा पुनर्निरीक्षण करने का विधिक अधिकार नहीं है। महापौर ने कलक्टर से उनकी कार्यवाही के सम्बन्ध में विधिक प्रावधान स्पष्ट करते हुए इससे निगम को अवगत कराने के कहा है।

जांच से आपत्ति नहीं

पत्र के अनुसार महापौर का कहना है कि कलक्टर की प्रस्तावित जांच से निगम को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किस विधिक प्रावधान के तहत जांच कमेटी गठित की गई है और पत्रावलियों की मांग की गई है यह स्पष्ट किया जाए। गौरतलब है कि पत्रिका में इस मामले को लेकर प्रकशित खबरों के आधार पर जिला कलक्टर विश्व मोहन शर्मा ने 22 फरवरी को निगम को पत्र लिख जांच रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद 27 फरवरी को पुन: पत्र जारी करते हुए निगम की 13 व्यावसायिक नक्शों की पत्रावलियों की जांच एवं मौका रिपोर्ट के लिए एडीएम प्रथम की अध्यक्षता में एसडीएम, वरिष्ठ नगर निगम नियोजक, अधीक्षण अभियंता नगर निगम तथा डीएलआर नगर निगम की कमेटी गठित कर तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी।

पत्रावलियां भेजने पर लगाई रोक

महापौर ने आयुक्त को यूओ नोट जारी 13 व्यावसायिक पत्रावलियां जिनका प्रस्ताव साधारण सभा में 14-15 को पारित किया जा चुका है को तुरंत भेजने को कहा है। साथ ही इन पत्रावलियों पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही अथवा कहीं भी प्रेषित किए जाने से पूर्व महापौर से स्वीकृति लेनी होगी।

मैंने पत्र लिखा है, जांच कराने का आधार पूछा गया है। नक्शे एम्पावर्ड कमेटी व साधारण सभा में पास किए गए हैं। कलक्टर को जांच कराने का अधिकार नहीं है

धर्मेन्द्र गहलोत, महापौर, नगर निगम