
vendors zone
अजमेर/ब्यावर।
अजमेर और ब्यावर को शहर को सुंदर व व्यवस्थित करने के लिए बरसों से स्ट्रीट वेंडिंग नीति को लेकर प्रयास चल रहे हैं। यह योजना फलीभूत नहीं हो पा रही है। पूर्व में प्रयास भी किए गए, लेकिन कुछ समय बाद ही व्यवस्था पटरी से उतर गई। एक दशक से चल रही इस कवायद के बाद भी नतीजा सिफर है। ना अजमेर के अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम ना ब्यावर की नगर परिषद ने कोई पहल की है। वेंडिंग जोन की क्रियान्विति को लेकर कोई सार्थख प्रयास नहीं हो सके हैं।
ऐसे में यह बैठक के बिन्दु बनकर रह गए। शहर की बढ़ती आबादी व ठेलों की संख्या को देखते हुए नए वेंडिंग जोन बनाने के लिए बैठक का आयोजन किया गया। इसमें 17 वेंडिंग जोन तय किए गए। इसमें निजी फर्म की ओर से किए गए सर्वे में एक हजार छह सौ अस्सी स्ट्रीट वेंडर्स सूचीबद्ध किए गए। इन्हें 17 जोन में अलग-अलग स्थान उपलब्ध कराया जाना था।
एक पखवाड़ा बीत जाने के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। यही ढिलाई चलती रही तो यह कार्ययोजना भी पूर्व की तरह ही फाइलों तक ही सीमित रहेगी। जबकि मुख्य पाली बाजार, चांगगेट, अजमेरी गेट, छावनी मार्ग सहित अन्य स्थानों पर ठेले बेतरतीब खड़े रहते हैं। इससे आवागमन बाधित होने के साथ ही लोगों को परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है।
उपखंड स्तरीय बैठक में हुआ था तय
उपखंड स्तरीय यातायात सलाहकार समिति एवं स्ट्रीट वेंडर नीति की बैठक में पूर्व में तय किया गया कि पाŸवनाथ चिकित्सालय के पास चागगेट डिपो का स्थानान्तरण, सेंदडा रोड डिपो का अजगर बाबा थान के पास स्थानान्तरण, सड़कों की चौड़ाई बढ़ाना व फुटपाथ का निर्माण, फल-सब्जी ठेलों का स्थान निर्धारण, यातायात ***** लगाना, यातायात गुमटी लगाना, अव्यवस्थित वाहनों का चालान, भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक एवं छावनी फाटक बाहर प्राइवेट बस स्टैंड का निर्माण किए जाने के प्रस्ताव शामिल थे। तत्कालीन उपखंड अधिकारी भगवती प्रसाद के कार्यकाल में पाŸवनाथ चिकित्सालय के पास एवं अजगर बाबा के थान के पास चांगगेट वाले बस स्टैंड को स्थानांतरित किया गया। यह व्यवस्था कुछ दिन चली, लेकिन बाद में यह वापस पटरी से उतर गई।
अब यह स्थान हुए तय
-बोहरा पार्क एवं रामदेव मंदिर
-पाŸवनाथ अस्पताल के समीप
-ब्रह्मानंद बगीची
-पोस्ट ऑफिस
-गिब्सन हॉस्टल के पास
-तेजाजी का थान
-मेवाड़ी गेट से सब्जी मंडी तक
अब पार्किंग प्लान की तैयारी
बरसों से स्ट्रीट वेंडर नीति को लागू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह अब तक सफल नहीं हो सकी है। अब बढ़ते यातायात को देखते हुए विभिन्न स्थानों पर पार्किंग प्लान बनाए जाने का भी निर्णय किया गया है। अब तक स्ट्रीट वेंडर नीति की क्रियान्विति ही नहीं हो पा रही है। ऐसे में पार्किंग प्लान की मंशा जल्द फलीभूत होना आसान नहीं है।
नहीं हो सकी पालना
उपखंड स्तरीय यातायात सलाहकार समिति की बैठक में वाहनों के दबाव को देखते हुए सतपुलिया से लेकर रेल पुलिस चौकी तक नो-वेंडिंग जोन तय किया गया। कुछ ही समय बाद इस ही नो-वेंडिंग जोन में ही चौपाटी शुरू करा दी गई। मुख्य मार्ग पर बेतरतीब पार्किंग से यहां पर दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है।
नहीं मिल सके स्मार्ट कार्ड
स्ट्रीट वेंडर नीति के तहत सर्वे में सामने आए एक हजार छह सौ अस्सी स्ट्रीट वेंडर्स को स्मार्ट कार्ड दिए जाने प्रस्तावित किए गए। इसके तहत आवेदन भी भरवाए गए, लेकिन अब तक एक भी वेंडर्स को स्मार्ट कार्ड नहीं दिया जा सका है।
शहर में 17 वेंडिंग जोन प्रस्तावित किए गए हैं। इनकी क्रियान्विति के लिए कनिष्ठ अभियंता को बैठक में जिम्मेदारी दी गई है। इसके क्रियान्वयन के बाद अगले चरण का काम शुरू होगा।
- नीरज साईवाल, मैनेजर, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन
Updated on:
17 Jul 2018 03:47 pm
Published on:
18 Jul 2018 09:21 am
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