
उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का 100 साल का इतिहास बदलते-बदलते रह गया है। 15 सितंबर यानी आज होने वाले अमुटा के चुनाव को कुलपति तारिक मंसूर ने निरस्त कर दिया है। बता दें कि इस चुनाव में पहली बार एक महिला प्रोफेसर चांदनी बी निर्विरोध निर्वाचित हो गई थीं। जबकि गुरुवार को सचिव और संयुक्त पद पर चुनाव होना था, लेकिन उससे पहले ही कुलपति ने चुनाव को निरस्त कर दिया। एएमयू के प्रवक्ता प्रोफेसर साफे किदवई का कहना है कि शिक्षकों की शिकायत के बाद कुलपति ने चुनाव निरस्त किया है। इस मामले में चार सदस्यीय जांच कमेटी भी बनाई गई है। जबकि एएमयू के कुछ प्रोफेसरों का मानना है कि पुरुष प्रोफेसर को एक महिला प्रोफेसर का अध्यक्ष बनना रास नहीं आया। इसलिए चुनाव रद्द किए गए हैं।
बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय टीचर एसोसिएशन (अमुटा) का चुनाव निरस्त होने पर तरह-तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। एएमयू छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी का कहना है कि इसकी वजह कुछ और नहीं। सिर्फ और सिर्फ एक महिला की सदारत को कुबूल नहीं करना है। क्योंकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मेल प्रोफेसर कभी यह बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं कि अमुटा की प्रेसिडेंट एक महिला बने।
...और कर दिया खेला
उन्होंने कहा कि प्रोफेसर चांदनी बी अकेली अध्यक्ष पद की उम्मीदवार थीं, जिन्होंने आवेदन किया था। चांदनी बी अपना प्रेसिडेंट मानना पुरुष प्रोफेसर्स को हजम नहीं हुआ और उन्होंने चुनाव कैंसिल कराने का खेला कर दिया। अब दूसरा कोई पुरुष प्रोफेसर उनके खिलाफ खड़ा करना चाहते हैं।
यह भी पढ़े - लखीमपुर मामले पर मायावती का योगी सरकार पर हमला
नदीम अंसारी ने उठाए गंभीर सवाल
उन्होंने सवाल किया है कि क्या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में महिला होना गुनाह है? क्या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक महिला को चुनाव लड़ने की आजादी नहीं देती? एक महिला हमारे देश की राष्ट्रपति बन सकती है, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अमुटा की अध्यक्ष एक महिला नहीं बन सकती?
Published on:
15 Sept 2022 12:14 pm
बड़ी खबरें
View Allअलीगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
