
mannan bashir wani
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का रिसर्च स्कॉलर रहा हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर आतंकी मन्नान बशीर वानी को सेना ने कुपवाड़ा में एक ऑपरेशन के दौरान मार गिराया। यहां तक तो ठीक था। आपके कान यह जानकर खड़े हो जाएंगे कि एएमयू में आतंकवादी का समर्थन किया गया। कश्मीरी छात्रों ने मन्नान को शहीद घोषित कर नमाज ए जनाजा पढ़ने का प्रयास किया। अनेक छात्र इसके विरोध में खड़े हो गए। सुरक्षा कर्मचारियों ने इन छात्रों क भगाया। तीन छात्रों को निलंबित कर दिया गया है।
यह भी पढ़ें
सुरक्षा कर्मचारियों ने दौड़ाया
मन्नान की मौत के बाद सोशल मीडिया पर संदेश प्रसारित किया गया कि मन्ना भाई शहीद हो गए हैं। साढ़े तीन बजे से कैनेडी हॉल परिसर में नमाज ए जनाजा होगा। करीब 150 कश्मीरी छात्र जमा हो गए। अनुशासन समिति के सदस्य भी आ गए। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन कई वरिष्ठ छात्रों के साथ वहां पहुंचे। सबका कहना था कि नमाज ए जनाजा हुआ तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पूरे देश में बदनाम हो जाएगा। नमाज को लेकर बहस हो गई। फैजुल हसन ने कहा कि जनाजे की नमाज पढ़नी हो तो मन्नान के घर जाओ। छात्र नमाज की जिद पर अड़े थे। इस पर सुरक्षा कर्मचारी छात्रों की ओर लाठी लेकर दौड़े। फिर छात्र भाग खड़े हुए। एएमयू जन संपर्क विभाग के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि नमाज ए जनाजा नहीं पढ़ने दिया गया। अनुशासनहीनता के मामले में तीन छात्रों को निलंबित कर दिया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
यह भी पढ़ें
पहली बार विरोध
संसद पर हमले के मास्टर माइंड अफजल गुरु की फांसी के बाद एएमयू में कश्मीरी छात्रों ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी के बाहर नमाज ए गायबाना अदा की थी। तब इसका विरोध नहीं हुआ था। इस बार विरोध हुआ है
यह भी पढ़ें
पुलिस की फाइलों में गुमशुदा
जम्मू कश्मीर में सेना के हाथों मारा गया हिजबुल कमांडर और एएमयू का पूर्व छात्र मन्नान वानी अलीगढ़ पुलिस की फाइलों में गुमशुदा के रूप में दर्ज है। नौ महीने पहले उसके विश्वविद्यालय से अचानक लापता हो जाने के बाद एएमयू इंतजामिया की ओर से थाना सिविल लाइन में उसकी गुमशुदी दर्ज करायी गई थी। मन्ना एएमय से पीएचडी कर रहा था।
Updated on:
12 Oct 2018 08:59 am
Published on:
12 Oct 2018 08:59 am
