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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षकों को दिया निर्देश, कैद अभियुक्तों को कानपुर नगर की ट्रायल कोर्ट में करें पेश

कोर्ट ने जिला न्यायाधीश कानपुर नगर से ट्रायल की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है। अर्जी की सुनवाई 6जून 22को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने विवेक त्रिपाठी की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। अर्जी पर अधिवक्ता अश्वनी कुमार ओझा ने बहस की।इनका कहना है कि कानपुर नगर के चकेरी थाने में षड्यंत्र हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में एफ आई आर दर्ज कराई गई है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षकों को दिया निर्देश, कैद अभियुक्तों को कानपुर नगर की ट्रायल कोर्ट में करें पेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षकों को दिया निर्देश, कैद अभियुक्तों को कानपुर नगर की ट्रायल कोर्ट में करें पेश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक झांसी, उन्नाव व आजमगढ़ को निर्देश दिया है कि उनके जेलों में कैद अभियुक्तों विवेक त्रिपाठी, आनंद त्रिपाठी व सुमित अवस्थी को ट्रायल कोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने सभी जेल अधीक्षकों व आजमगढ़ उन्नाव के एस पी व झांसी के एस एस पी 6 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने तीनों जिलों के एस पी,एस एस पी को पुलिस बल मुहैया कराने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने जिला न्यायाधीश कानपुर नगर से ट्रायल की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है। अर्जी की सुनवाई 6जून 22को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने विवेक त्रिपाठी की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। अर्जी पर अधिवक्ता अश्वनी कुमार ओझा ने बहस की।इनका कहना है कि कानपुर नगर के चकेरी थाने में षड्यंत्र हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में एफ आई आर दर्ज कराई गई है। जिसके तहत याची 19जुलाई 16से जेल में बंद हैं। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। अन्य सभी अभियुक्त जमानत पर रिहा है।ट्रायल कोर्ट में गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है।फिर भी ट्रायल पूरा करने में देरी की जा रही है। इसलिए जमानत पर रिहा किया जाए।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट: गैंगस्टर अब्बास अंसारी के किराएदारों की मांग पर प्रशासक नियुक्ति का निर्देश

कोर्ट ने कहा है कि गैंगस्टर की संपत्ति कुर्की से तीसरे पक्ष के हित प्रभावित हुए हैं। उन्हें व्यवसाय करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा प्रशासक किराये का खाता रखें और कानून के तहत उपयोग में लाये। यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की खंडपीठ ने राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल व चार अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय ने बहस की।