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इलाहाबाद हाईकोर्ट: गैंगस्टर अब्बास अंसारी के किराएदारों की मांग पर प्रशासक नियुक्ति का निर्देश

कोर्ट ने कहा है कि गैंगस्टर की संपत्ति कुर्की से तीसरे पक्ष के हित प्रभावित हुए हैं। उन्हें व्यवसाय करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा प्रशासक किराये का खाता रखें और कानून के तहत उपयोग में लाये। यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की खंडपीठ ने राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल व चार अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय ने बहस की।
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प्रयागराज

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Sumit Yadav

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Updated: 3 Jun 2022, 1:57 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट: गैंगस्टर अब्बास अंसारी के किराएदारों की मांग पर  प्रशासक नियुक्ति का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट: गैंगस्टर अब्बास अंसारी के किराएदारों की मांग पर प्रशासक नियुक्ति का निर्देश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाहुबली मुख्तार अंसारी के गैंग्स्टर बेटे अब्बास अंसारी की कुर्क जमीन पर किराये की दूकान चला रहे याचियों की प्रशासक नियुक्त करने की अर्जी पर जिलाधिकारी गाजीपुर को दो सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि गैंगस्टर की संपत्ति कुर्की से तीसरे पक्ष के हित प्रभावित हुए हैं। उन्हें व्यवसाय करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा प्रशासक किराये का खाता रखें और कानून के तहत उपयोग में लाये। यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की खंडपीठ ने राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल व चार अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

याचिका पर अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय ने बहस की। मालूम हो कि गैंगस्टर अब्बास अंसारी की संपत्ति कुर्क की गयी। याचियों ने जिलाधिकारी से प्रशासक नियुक्त कर किराया वसूली की व्यवस्था करने की मांग की ।जिसे जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा जिलाधिकारी को कानूनी अधिकार है किन्तु उन्होंने अपनी शक्ति का सही दिशा में इस्तेमाल नहीं किया।आम आदमी जो गैंग के सदस्य नहीं हैं। गैंगस्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रभाव उनपर नहीं पड़ना चाहिए।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट: घरों में फर्जी जांच करने के मामले में तीन जूनियर अभियंताओं पर कार्रवाई के निर्देश

मामले में याची की ओर से शिकायत की गई थी कि उसके घर पर कुछ लोग पहुंचे और अपने को विद्युत निगम के कर्मचारी बताते हुए मीटर आदि की जांच करने लगे। उन्होंने याची पर पेनाल्टी भी लगा दी। उसे शंका हुई तो उसने डीएम और कमिश्नर से शिकायत की। मामले में जांच हुई तो फर्जी पाया गया। याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्रवाई की मांग की थी।

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