16 जून 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शिक्षामित्रों को हाईकोर्ट से लगा एक और झटका, अब आयी यह बुरी खबर

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ठुकरायी शिक्षामित्रों की मांग

2 min read
Google source verification
Allahabad High Court

Allahabad High Court refused Shiksha Mitra demand

इलाहाबाद. उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द हो जाने के बाद प्रस्तुत प्रशिक्षु शिक्षक के रूप में चयनित शिक्षामित्रों को इस पद पर ज्वाइनिंग (कार्यभार ग्रहण) की अनुमति दिये जाने की मांग को ठुकरा दिया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को 72 हजार 825 शिक्षकों की भर्ती में खाली रह गये 6160 पदों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार निर्णय लेने की छूट दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 66655 शिक्षकों की नियुक्ति के बाद खाली बचे 6160 पदों को नया विज्ञापन जारी कर भर्ती करने का राज्य सरकार को आदेश दिया है।

यह भी पढ़ें- योगी सरकार से इन शिक्षामित्रों को झटका, मच सकता है हड़कंप

यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने अरविन्द कुमार व कई अन्य याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है। मालूम हो कि राज्य सरकार ने 26 मई 1999 को मानदेय पर शिक्षामित्रों को प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने के लिए नियुक्ति करने का फैसला लिया। ग्राम स्तरीय कमेटी की संस्तुति पर जिला स्तरीय कमेटी के अनुमोदन से शिक्षा मित्रों की नियुक्ति की गयी। यह नियुक्तियां सर्वशिक्षा अभियान को अमली जामा पहनाने के लिए की गयी। एक जुलाई 2011 को संसद से पारित अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 लागू किया गया। राज्य सरकार ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना जारी कर शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा से प्रशिक्षण देने का फैसला लिया गया।

यह भी पढ़ें- बीजेपी के इस कद्दावर मंत्री के भाई चाहते हैं मेयर का टिकट, क्या होगा दलबदल कर आई नन्दी की पत्नी अभिलाषा का...

याचीगण का कहना है कि उन्होंने दो वर्षीय डिप्लोमा लिया और टीईटी पास किया और प्रशिक्षु शिक्षक के रूप में चयनित हुआ। इसी बीच राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजित करने का निर्णय लिया। 19 जून 2013 शिक्षामित्रों का समायोजन किया गया जिसे हाईकोर्ट ने रदद कर दिया। और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी पुष्टि की। इस फैसले के बाद प्रशिक्षु शिक्षक पद पर चयनित याचियों ने समायोजन रदद होने के बाद सहायक अध्यापक पद पर ज्वाइन कराने की मांग में हाईकोर्ट की शरण ली थी। जिस पर कोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है।

by Prasoon Pandey

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग