
हर माह 15 करोड़ का गुटखा खाकर आर्थिक सेहत खराब कर रहे अलवर के लोग, पर्यावरण को भी हो रहा नुकसान
अलवर. गुटखा जिले में लोगों की सेहत से ही नहीं उनकी आर्थिक हालत भी बिगाड़ रहा है। जिले में युवा पीढ़ी गुटखे पर जितनी राशि खर्च कर रही है, उतने में गुटखा खाने वाले लोग लखपति बन जाए। इतना ही नहीं गुटखे पर हर दिन खर्च होने वाले राशि को समाज की बेहतरी के उपयोग में लिया जाए तो एक ही दिन में कई बड़ी समस्याओं का निराकरण संभव है। गुटखा व्यवसाय के जानकारों का मत है कि अलवर जिले में एक दिन में करीब 50 लाख रुपए का लोग गुटखा गटख जाते हैं।
जिले में गुटखा खाने वाले लोगों की संख्या घटने के बजाय दिनों दिन बढ़ रही है। शहरी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि गांव व कस्बों में बड़ी संख्या में गुटखा का सेवन करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में युवा ही नहीं छोटी उम्र के बच्चे का खुलेआम गुटखा का सेवन करने लगे हैं। यही कारण है कि हर गली मोहल्ले की दुकानों पर भले ही खान पान की अन्य वस्तुएं उपलब्ध नहीं हो, लेकिन गुटखा के पाउच जरूर दिखाई पड़ जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हालत यह हो गई कि खाद बीज की दुकानों पर भी गुटखा के पाउच लटके दिखाई पडऩे लगे हैं। यह गुटखा के बढ़ते सेवन के कारण ही संभव हुआ है।
चारों तरफ फैलती है गंदगी
गुटखे से गंदगी भी फैलती है। दरअसल गुटखा खाने वाले लोग दीवारों पर थूक देते हैं। इससे दिवार व शहर गंदा होता है। जो दूसरी तरफ गुटखे के पाउच से नाली व नाले बंद हो जाते हैं। चारों तरफ गुटखे के पाउच जमीन को भी खराब करते हैं।
धड़ल्ले से होती है टैक्स की चोरी
इस कारोबार में टैक्स की धडल्ले से चोरी होती है। छोटे दुकानदारों को आज भी बिना बिल के गुटखा मिलता है। इसका मतलब गुटखा कारोबारी के जेब में यह पैसा सीधा जाता है। इसका सरकार के पास कोई टैक्स नहीं पहुंचता है। इसी तरह से कारोबारी गुटखा बनाने के नाम पर सुपारी बनाते हैं क्योंकि सुपारी पर कम टैक्स लगता है।
Published on:
18 Jun 2018 09:56 am
