4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

6 साल मुआवजा नहीं मिला, अब किसान लेने से मना कर रहे

10 में से पांच गांवों की जमीन पहले अधिग्रहण से मुक्त कर दी, अब शेष पांच गांवों के लोग मुआवजा राशि को कम बता रहे
2 min read
Google source verification

अलवर

image

Hiren Joshi

Mar 05, 2019

6 years compensation is not found, now farmers are refusing to take

6 साल मुआवजा नहीं मिला, अब किसान लेने से मना कर रहे

अलवर.

दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर मुण्डावर के 10 गांवों की जमीन अधिग्रहण करने के करीब 6 साल तक सरकार ने मुआवजा नहीं दिया। अब दस में से पांच गांवों के किसानों की जमीन का मुआवजा आने लगा तो किसानों ने लेने से मना कर दिया। जिसके कारण डीएमआईसी का प्रोजेक्ट सालों पीछे चला गया। आगे की तस्वीर भी साफ नहीं है कि कब तक यह प्रोजेक्ट धरातल पर आ सकेगा। 3 अप्रेल 2012 से किसान पाबंद 3 अप्रेल 2012 को अधिसूचना जारी कर सरकार ने मुण्डावर के गांव मानका, सखतपुरा, बावद, लामचपुर, बिरोद, पलावा एवं मिर्जापुर व नीमराणा के जोनायचा खुर्द, शाहजहांपुर, गुगलकोटा, चौबारा गांवों की करीब 1425 हैक्टेयर जमीन चिह्नित की। एक तरह जमीन अधिग्रहण किए जाने के कारण किसान पाबंद हो गए कि चिह्नित जमीन का कोई दूसरा उपयोग नहीं कर सकते। न बेचान कर सकेंगे। पांच साल बाद पांच गांवों की जमीन छोड़ी 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले पांच गांवों के किसानों की जमीन को अवाप्ति से मुक्त कर दिया। जिससे डीएमआईसी का प्रोजेक्ट वहीं आधा रह गया। शाहजहांपुर, जोनायचा खुर्द, गुगलकोटा, चौबारा, सख्तपुरा व बावद की 893 हैक्टर जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया। 2 हजार 732 करोड़ मुआवजा तय हुआ शुरू में दस गांवों की अधिग्रहण वाली जमीन का 2 हजार 732 करोड़ रुपए मुआवजा तय हुआ। इतने बजट का बंदोबस्त नहीं हुआ तो सरकार ने पांच गांवों की जमीन को अवाप्ति से मुक्त कर दिया। अवाप्ति से मुक्त किए गांवों की जमीन अधिक महंगी थी। इसके बाद किसानों में विरोध उठता गया। अब किसानों को मुआवजा मिल रहा अब पांच गांवों के किसानों का मुआवजा मिलने लगा है। जिसे किसान यह कहकर लेने से मना कर रहे हैं कि मुआवजा कम है। छह साल पहले जमीन ली। उसी हिसाब से मुआवजा मिले। किसान रामावतार व होशियान सिंह का कहना है कि मुआवजा बैंक खातों में डाला जा रहा है लेकिन वे उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कुछेक किसानों ने पहले ही तय कर लिया था कि इस भाव सेमुआवजा नहीं लेंगे। जिसके कारण उन्होंने बैंक खातों की जानकारी नहीं दी। जिसके कारण डीएमआईसी का पूरा प्रोजेक्ट ही अधरझूल में लटका हुआ है।

शाहजहांपुर, जोनायचा खुर्द, गुगलकोटा, चौबारा, सख्तपुरा व बावद की 893 हैक्टर जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया। 2 हजार 732 करोड़ मुआवजा तय हुआ शुरू में दस गांवों की अधिग्रहण वाली जमीन का 2 हजार 732 करोड़ रुपए मुआवजा तय हुआ। इतने बजट का बंदोबस्त नहीं हुआ तो सरकार ने पांच गांवों की जमीन को अवाप्ति से मुक्त कर दिया। अवाप्ति से मुक्त किए गांवों की जमीन अधिक महंगी थी। इसके बाद किसानों में विरोध उठता गया। अब किसानों को मुआवजा मिल रहा अब पांच गांवों के किसानों का मुआवजा मिलने लगा है। जिसे किसान यह कहकर लेने से मना कर रहे हैं कि मुआवजा कम है। छह साल पहले जमीन ली। उसी हिसाब से मुआवजा मिले। किसान रामावतार व होशियान सिंह का कहना है कि मुआवजा बैंक खातों में डाला जा रहा है लेकिन वे उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कुछेक किसानों ने पहले ही तय कर लिया था कि इस भाव सेमुआवजा नहीं लेंगे। जिसके कारण उन्होंने बैंक खातों की जानकारी नहीं दी। जिसके कारण डीएमआईसी का पूरा प्रोजेक्ट ही अधरझूल में लटका हुआ है।