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राजस्थान में यौन शोषण मे अव्वल है अलवर, यहां बेटियां नहीं है सुरक्षित, जानिए ये हैरान कर देने वाले आंकड़े

अलवर जिला प्रदेश में यौन शोषण के मामलों मे अव्वल है। लेकिन इसके बावजूद भी चेत नहीं रहे हैं।
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अलवर

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Hiren Joshi

Mar 05, 2019

Alwar At Top In Crime Against Women In Rajasthan

राजस्थान में यौन शोषण मे अव्वल है अलवर, यहां बेटियां नहीं है सुरक्षित, जानिए ये हैरान कर देने वाले आंकड़े

अलवर. अलवर जिला कई वर्षों से बालकों के यौन शोषण मामले में प्रदेश में अव्वल रहा है। यहां छात्रावासों में होने वाली अनियमितताओं एवं यौन शोषण को रोकने के कारगर कदम भी नहीं उठाए जा सके। यही कारण है कि जिला स्तर पर बालकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनी कमेटिया निष्प्रभावी साबित हो रही हैं।

वर्ष 2018 में बच्चों के साथ यौन शोषण के मामले में अलवर जिला प्रदेश में पहले स्थान पर रहा था। ऐसे अपराध रोकने के लिए शिक्षा विभाग की टीम को एक माह में तीन निरीक्षण करने का नियम है। वहीं बाल अधिकार समिति भी निरीक्षण कर सकती है। शिक्षा विभाग की टीम इन छात्रावासों में निरीक्षण के नाम पर छात्रावास अधीक्षक से मेजबानी करवा कर वापस आ जाती है जिससे यहां होने वाली अनियमितता उजागर नहीं हो पाती।

ये है आंकड़े-

वर्ष 2018 में बलात्कार के कुल प्रकरण 4335 जिनमें से बच्चियां पीडि़तों की संख्या -2213

वर्ष 2017 में 1555 बालिकाओं को बलात्कार का शिकार बनाया गया।

वर्ष 2018 में जिले वार आंकड़े

प्रथम स्थान पर अलवर - 196 मामले
द्वितीय स्थान जयपुर-184 मामले
तृतीय स्थान जोधपुर-131 मामले
चौथे स्थान पर भरतपुर -116 मामले
पांच स्थान पर उदयपुर- 104 मामले

राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल

जिस छात्रावास में यह मामला सामने आया। इस छात्रावास अधीक्षक का कार्यकाल तक बढ़ाया गया और उसे प्रदेश की बेस्ट वार्डन का इनाम भी दिया गया। इस छात्रावास अधीक्षक को कुछ जन-प्रतिनिधियों का वरदहस्त रहा है, जिन्होंने इसके बिल पास कराने और पुरस्कार दिलवाने में भूमिका निभाई। कई छात्रावासों में बेटियों के लिए बेहतर काम हो रहा है, लेकिन उनकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पुरस्कार के लिए कभी अभिशंसा तक नहीं की। वहीं आरोपी वार्डन को भी राज्य स्तरीय पुरस्कार दिलाने की अभिशंसा करने से पूर्व किसी ने उनके कार्यों की जांच तक नहीं की। एक विभागीय अधिकारी का कहना है कि छात्रावास अधीक्षक का एक बिल पास नहीं कराया तो उन्होंने एक जन -प्रतिनिधि से दवाब डलवाकर उन्हें छात्रावास विकास समिति से हटवा दिया।

बच्चों को न्याय दिलाने वाली बाल कल्याण समिति ने कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे मामले रोकने के लिए साल भर समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए। शिक्षा विभाग को इस मामले में गंभीरता से सोचना चाहिए। इनके यहां संविदकर्मियों के मामले में जांच करनी होगी। अलवर जिले मे ऐसे कई मामले सामने आ गए हैं। यह लापरवाही का नतीजा है जिसमें ऐसे प्रकरण तो कई बार सामने आए लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
राकेश तिवाड़ी, बाल संरक्षण के विशेषज्ञ, जयपुर।