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Rajasthan: 822 गांवों की प्यास बुझाने वाली अलवर-भरतपुर-चंबल पेयजल परियोजना फिर अटकी, जानें क्यों

Alwar-Bharatpur-Chambal Drinking Water Project : अलवर जिले के 822 गांवों के हजारों परिवारों की प्यास बुझाने वाली अलवर-भरतपुर-चंबल पेयजल परियोजना फिर अटक गई है। वन विभाग की एनओसी, भूमि अधिग्रहण और वित्तीय मंजूरियों में देरी के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।

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अलवर

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Anil Prajapat

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जितेंद्र चौधरी

Jun 18, 2026

Alwar-Bharatpur-Chambal Drinking Water Project

अलवर-भरतपुर-चंबल पेयजल परियोजना (फोटो: एआई)

अलवर। जिले के 822 गांवों के हजारों परिवारों की प्यास बुझाने वाली अलवर-भरतपुर-चंबल पेयजल परियोजना फिर अटक गई है। वन विभाग की एनओसी, भूमि अधिग्रहण और वित्तीय मंजूरियों में देरी के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। स्थिति यह है कि अब विभाग को निविदा प्रक्रिया भी नए सिरे से शुरू करनी पड़ेगी। ऐसे में चंबल का पानी अलवर पहुंचने का सपना फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रहा है।

परियोजना के तहत पुराने अलवर जिले के रामगढ़, बहरोड़, नीमराणा, मांढ़ण, खैरथल-तिजारा, किशनगढ़बास, हरसोली, कोटकासिम और मुंडावर क्षेत्र पानी पहुंचाया जाएगा। यह परियोजना जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पेयजल संकट के स्थायी समाधान के रूप में देखी जा रही है। इस परियोजना के लिए पुराने अलवर जिले में 122 स्थानों पर भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है।

इन स्थानों पर उच्च जलाशय (ओएचएसआर) और पंप हाउस बनाए जाएंगे, जिनके जरिए गांवों व कस्बों तक पानी की आपूर्ति की जाएगी। हालांकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। मामला फिलहाल जिला कलक्टर स्तर पर लंबित है। अब तक केवल भिवाड़ी क्षेत्र में ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो सकी है। वहीं रामगढ़, कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा क्षेत्रों से संबंधित कई प्रस्ताव स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं।

वन विभाग की एनओसी बड़ी बाधा

परियोजना के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), ग्राम पंचायतों और नगर निकायों से आवश्यक एनओसी मिल चुकी है, लेकिन वन विभाग की मंजूरी अभी तक नहीं मिल पाई है। बताया जा रहा है कि राजस्व अभिलेखों और जीपीएस आधारित नक्शों के मिलान में तकनीकी विसंगतियां सामने आ रही हैं। पटवारियों द्वारा अपलोड किए गए भू-रिकॉर्ड और वन विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर होने के कारण फाइलें अटकी हुई हैं।

वित्तीय मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया भी अटकी

परियोजना को एक और झटका वित्तीय स्तर पर लगा है। विभाग द्वारा तैयार किए गए प्री-क्वालिफिकेशन दस्तावेजों को एरिया वित्त समिति से मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसके अलावा एनवीटी (नेट प्रेजेंट वैल्यू ट्रांजेक्शन) सहित अन्य वित्तीय दायित्वों को लेकर राजस्थान जल अवसंरचना निगम की ओर से भी अंतिम सहमति नहीं मिल पाई है। इसी कारण अब निविदा प्रक्रिया को दोबारा तैयार कर नए सिरे से टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है।

तीन साल में पूरा होना था काम

परियोजना की डीपीआर के अनुसार कार्य शुरू होने के बाद इसे तीन वर्षों में पूरा किया जाना है। लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। प्रशासनिक मंजूरियों और तकनीकी प्रक्रियाओं में हो रही देरी के चलते परियोजना की समय सीमा लगातार आगे खिसक रही है।

भरतपुर में मिल रही राहत, अलवर को इंतजार

परियोजना के प्रथम चरण के तहत भरतपुर संभाग के नगर और डीग सहित कई क्षेत्रों में चंबल का पानी पहुंच चुका है। वहां लोगों को पेयजल संकट से राहत मिली है। अब अलवर के लोग भी उसी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन इंतजार लंबा है।