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ना जूते ना ग्लब्स, अलवर में चार सफाईकर्मियों की मौत के बाद भी नहीं ले रहे सबक

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अलवर

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Hiren Joshi

Oct 01, 2018

Alwar Cleaning Staff Cleaning Sewers Barefooted

ना जूते ना ग्लब्स, अलवर में चार सफाईकर्मियों की मौत के बाद भी नहीं ले रहे सबक

अलवर . करीब चार साल पहले काली मोरी फाटक के निकट सीवरेज लाइन के चैम्बर में चार सफाईकर्मियों की मौत के बावजूद नगर परिषद प्रशासन गंभीर लापरवाही बरत रहा है। सफाईकर्मियों को बिना जूते, ग्लब्स व मास्क के गहरे नालों में सफाई करा रहा है। ऐसे नाले जिनमें सालों से सफाई नहीं हुई। अब नई भर्ती के बाद नालों की सफाई होने लगी है लेकिन सफाइकर्मियों की जिन्दगी से खिलवाड़ हो रहा है।

फावड़े भी खुद लेकर आ रहे

सफाईकर्मियों ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके गोयल आए उस दिन लाल रंग की जैकेट पहनने को दी हैं। इससे किसी तरह का बचाव नहीं हो रहा बल्कि एक सफाईकर्मी की पहचान हो रही है। सफाइकर्मी फावड़े भी खुद के स्तर से लेकर आ रहे हैं। न कोई उपकरण मिल रहे न सफाई के काम आने वाला सामान। जिसके कारण सफाइकर्मियों में रोष बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों तीन सफाइकर्मियों को निलम्बित करने के बाद कर्मचारियों ने विरोध भी जताया।

ये उपकरण जरूरी

सफाइ कर्मियों को बड़े जूते, हाथों में ग्लब्स, मुंह पर मास्क तो अति आवश्यक हैं। जबकि किसी भी कर्मचारी को कोई उपकरण नहीं मिल रहा है। न ठेकेदारों के जरिए काम कर रहे 550 कर्मचारियों को न नगर परिषद के स्थाई कर्मचारियों को। ये उपकरण नहीं होने से नालों में सफाई करते समय जहरीले जीव जन्तुओं के काटने व कांच के टुकड़े लगने का डर रहता है।

जहरीली गैस से बड़ा खतरा

शहर के कई जगहों पर सीवरेज लाइन के पास ही नाले हैं। नाले सालों से जाम पड़े हैं। किसी जगह सीवरेज लाइन या
चैम्बर लीक होने से सफाइकर्मी जहरीली गैस की चपेट में आ सकते हैं। मुंह पर मास्क होने की स्थिति में काफी बचाव रहता है। काली मोरी फाटक पर एक-एक करके चैम्बर में उतरने वाले चार कर्मचारियों की मौत हो गई थी। जैसे की कर्मचारी चैम्बर में जाता तुरंत बेहोश होकर वहीं गिर जाता। मतलब थोड़ा बहुत समय भी संभलने को नहीं मिला। इतना सब कुछ होने के बाद कर्मचारियों को आवश्यक उपकरण नहीं देकर उनकी जाने से खेलने जैसा है।

शहर में सफाईकर्मी
अस्थाई कर्मचारी 600
स्थाई कर्मचारी 572
प्रतिदिन कचरा करीब 125 टन
शहर में सफाई के ठेके 04

जल्दी मिलेंगे उपकरण

सफाईकर्मियों को जल्दी उपकरण मिलेंगे। यह उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ताकि कर्मचारियों को किसी तरह की दिक्कतें नहीं आएं।
रामकिशोर मीणा, आयुक्त, नगर परिषद अलवर